शिवपुरी; अब बसों में नहीं चलेगी लापरवाही: एक हादसे के बाद प्रशासन सख्त Aajtak24 News

शिवपुरी; अब बसों में नहीं चलेगी लापरवाही: एक हादसे के बाद प्रशासन सख्त Aajtak24 News

शिवपुरी - हाल ही में हुई बस दुर्घटना के बाद शिवपुरी प्रशासन ने यात्री सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब यात्री बसों और स्लीपर कोचों में सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों पर बस जब्ती तक की कार्रवाई की जाएगी। मंगलवार को आयोजित बैठक में बस संचालकों को सुरक्षा मानकों और परिवहन नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अब केवल दस्तावेज पूरे होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरणों की वास्तविक उपलब्धता और कार्यशील स्थिति भी जांची जाएगी।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में संचालित सभी यात्री बसों और स्लीपर बसों में आपातकालीन खिड़की, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और इमरजेंसी उपकरण अनिवार्य रूप से मौजूद रहें। अग्निशामक यंत्र केवल औपचारिकता नहीं बल्कि उपयोग योग्य स्थिति में होने चाहिए और उनकी समय-समय पर वैधता जांची जाए। बैठक में पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने भी बस संचालकों को सुरक्षा मानकों के पालन और आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रशासन ने बसों की विद्युत वायरिंग, बैटरी और ईंधन प्रणाली की नियमित जांच पर विशेष जोर दिया ताकि शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही चालक और परिचालक को अग्निशमन यंत्र के उपयोग का प्रशिक्षण देने की बात भी कही गई। स्लीपर बसों के लिए अलग से सख्त निर्देश जारी किए गए। इनमें ड्राइवर पार्टीशन डोर हटाना, सभी स्लीपर कोचों में फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाना, न्यूनतम 10 किलो क्षमता के अग्निशमन यंत्र रखना और अनधिकृत वाहन विस्तार पर रोक शामिल है।

इसके अलावा फिटनेस प्रमाण पत्र, बीमा, परमिट, प्रदूषण प्रमाण पत्र, आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस और वीएलटीडी दस्तावेज अद्यतन रखना अनिवार्य किया गया है। प्रशासन ने साफ किया कि क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई होगी। हालिया दुर्घटना के बाद प्रशासन का यह कदम यात्रियों में भरोसा बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यही रहेगा कि ये निर्देश बैठकों तक सीमित रहेंगे या सड़कों पर भी दिखाई देंगे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि सुरक्षा मानक इतने जरूरी हैं तो दुर्घटना से पहले बसों की नियमित जांच क्यों नहीं हुई और जिम्मेदारी किसकी तय की गई?
  2. जिले में चल रही कितनी बसें वर्तमान में फायर सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और फिटनेस मानकों पर खरी उतरती हैं—क्या प्रशासन यह आंकड़ा सार्वजनिक करेगा?
  3. बस संचालकों पर कार्रवाई की बात हो रही है, लेकिन क्या परिवहन और निगरानी तंत्र की जवाबदेही भी तय होगी यदि दोबारा ऐसी घटना होती है?

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