| बीजापुर के उसूर क्षेत्र में कलेक्टर विश्वदीप और जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे का सघन दौरा Aajtak24 News |
बीजापुर - नक्सल प्रभाव वाले बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड में गुरुवार को प्रशासनिक सक्रियता का अलग ही दृश्य देखने को मिला। कलेक्टर विश्वदीप और जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे ने पामेड़, गुण्डम, कोंडापल्ली और कर्रेगुट्टा क्षेत्र का व्यापक दौरा कर विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने स्कूल भवन, बाजार स्थल, निर्माणाधीन अधोसंरचनाओं और धर्माराम शिविर का निरीक्षण कर जमीनी हकीकत समझने की कोशिश की। दौरे की शुरुआत कोंडापल्ली स्कूल भवन से हुई, जहां अधिकारियों ने बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और भवन की स्थिति का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि नए शिक्षा सत्र से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। उन्होंने स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।
इसके बाद प्रशासनिक टीम स्थानीय बाजार स्थल पहुंची। यहां व्यापारिक गतिविधियों, साफ-सफाई व्यवस्था और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने बाजार क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित और सुविधायुक्त बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। ग्रामीणों ने भी बाजार में बुनियादी सुविधाओं की जरूरत और नियमित निगरानी की मांग अधिकारियों के सामने रखी। धर्माराम शिविर स्थल के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं और व्यवस्थाओं की समीक्षा की। कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और शिविरों में आने वाले ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए।
दौरे का सबसे चर्चित और आकर्षक हिस्सा कर्रेगुट्टा पहाड़ी का भ्रमण रहा। अधिकारियों ने क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, विकास संभावनाओं और आधारभूत सुविधाओं का अवलोकन किया। इसी दौरान कर्रेगुट्टा पहाड़ी के मैदान में कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और अन्य अधिकारियों ने सीआरपीएफ जवानों के साथ क्रिकेट खेलकर उनका उत्साहवर्धन किया। प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच यह आत्मीय दृश्य स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। इस मौके पर भूपेन्द्र गावरे, प्रभाकर चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों के इस दौरे को क्षेत्र में विकास और विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय बाद इतने वरिष्ठ अधिकारी सीधे गांवों तक पहुंचे हैं, जिससे लोगों में उम्मीद बढ़ी है कि अब दूरस्थ इलाकों की समस्याओं पर भी गंभीरता से काम होगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- कर्रेगुट्टा और उसूर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षों से अधूरी पड़ी आधारभूत सुविधाओं के लिए जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई, और अब तक विकास कार्यों की रफ्तार इतनी धीमी क्यों रही?
- अधिकारियों के दौरे और निरीक्षण के बाद क्या कोई समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाएगी, ताकि ग्रामीणों को पता चल सके कि उनकी समस्याओं का समाधान कब तक होगा?
- सीआरपीएफ जवानों के साथ क्रिकेट खेलना सकारात्मक संदेश जरूर है, लेकिन क्या प्रशासन सुरक्षा चुनौतियों के बीच इन इलाकों में स्थायी शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क नेटवर्क तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन और रणनीति रखता है?