| बीजापुर में टूटी ‘पीरियड्स’ पर चुप्पी: हथेलियों पर लगे रेड डॉट ने बदल दी सोच |
बीजापुर - नक्सल प्रभावित और दूरस्थ पहचान वाले बीजापुर जिले में अब माहवारी स्वच्छता को लेकर जागरूकता की नई लहर दिखाई दे रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाया जा रहा ‘रेड डॉट अभियान’ गांव-गांव तक पहुंचकर महिलाओं और किशोरियों को माहवारी से जुड़े मिथकों और शर्म की दीवार तोड़ने का संदेश दे रहा है। “चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो” थीम पर चल रहा यह अभियान अब जिले में जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
अभियान के तहत जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को जागरूकता का मुख्य केंद्र बनाया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं किशोरियों तथा महिलाओं के साथ माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर विशेष सत्र आयोजित कर रही हैं। इन सत्रों में सेनेटरी पैड के उपयोग, साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी खुलकर साझा की जा रही है। महिलाओं को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि माहवारी कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि प्राकृतिक प्रक्रिया है।
बीजापुर में “बीजादूतीर” स्वयंसेवकों और मितानिनों की भूमिका भी इस अभियान में बेहद अहम मानी जा रही है। स्वयंसेवक गांव-गांव जाकर किशोरियों और महिलाओं से सीधा संवाद कर रहे हैं, जबकि मितानिन दीदियां घर-घर पहुंचकर व्यक्तिगत स्वच्छता और माहवारी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैला रही हैं। अभियान के दौरान महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने हथेली पर लाल बिंदी लगाकर “माहवारी शर्म नहीं, सम्मान है” का संदेश दिया।
भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी भी इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल हुई। जिला रेड क्रॉस अधिकारी नरवेद सिंह के नेतृत्व में रेड क्रॉस टीम ने किशोरियों के बीच जागरूकता सत्र आयोजित किए और हाइजीन किट वितरण में सहयोग किया। सदस्यों ने भी रेड डॉट लगाकर स्वास्थ्य जागरूकता और स्वच्छता के प्रति लोगों को प्रेरित किया।
जिले में चल रहे सुशासन शिविरों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। शिविरों में केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि पुरुषों को भी माहवारी स्वच्छता के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से रेड डॉट लगाकर यह संदेश दिया कि माहवारी पर अब खुलकर बात करने की जरूरत है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत बीजापुर की गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाली महिला श्रमिकों को हाइजीन किट वितरित की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग और रेड क्रॉस सोसायटी के संयुक्त प्रयास से वितरित इन किटों में सेनेटरी पैड और साबुन शामिल थे। इससे महिला श्रमिकों में भी जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रेड डॉट केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि सोच बदलने का अभियान है। विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी किशोरी माहवारी के कारण स्कूल न छोड़े और हर महिला को सम्मानजनक माहौल मिले। “माहवारी पर बात होगी खुलकर, तभी बेटियां बढ़ेंगी आगे बढ़कर” का नारा अब बीजापुर में इस अभियान की नई पहचान बन चुका है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- रेड डॉट अभियान के जरिए जागरूकता की बात हो रही है, लेकिन क्या बीजापुर के दूरस्थ गांवों में किशोरियों को नियमित और सस्ती सेनेटरी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था भी बनाई गई है?
- माहवारी के कारण स्कूल छोड़ने वाली किशोरियों का जिला स्तर पर कोई आधिकारिक डेटा है, और यदि है तो अब तक उस संख्या में कितनी कमी आई है?
- अभियान में जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन क्या ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पर्याप्त शौचालय, पानी और डिस्पोजल व्यवस्था उपलब्ध है या यह अभियान केवल प्रतीकात्मक बनकर रह जाएगा?