ग्वालियर; अब सरकारी दफ्तर खुद बनाएंगे अपनी बिजली: बिना एक रुपया खर्च किए लगेगा सोलर Aajtak24 News

ग्वालियर; अब सरकारी दफ्तर खुद बनाएंगे अपनी बिजली: बिना एक रुपया खर्च किए लगेगा सोलर Aajtak24 News

ग्वालियर - मध्यप्रदेश में बिजली बचत और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार ने सभी शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। "प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना" के तहत रेस्को (RESCO) मॉडल के माध्यम से सरकारी भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे, जिससे बिना किसी प्रारंभिक निवेश के बिजली की बचत संभव हो सकेगी। ग्वालियर में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला की उपस्थिति में जिले के 30 शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करने के लिए विद्युत क्रय अनुबंध संपन्न हुए। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अगले एक वर्ष में सभी शासकीय कार्यालयों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल एजेंसी नियुक्त की गई है, जो योजना के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।

1300 सरकारी भवन होंगे सौर ऊर्जा से रोशन

मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह ने बताया कि राज्य के 55 जिलों में लगभग 48 मेगावॉट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित करने के लिए 1300 शासकीय भवनों को चिन्हित किया गया है। इसके लिए जिलेवार निविदाएं जारी की गई थीं, जिनमें 17 डेवलपर्स ने भाग लिया और 13 डेवलपर्स का चयन किया गया। उन्होंने बताया कि विभिन्न जिलों में बिजली दरें प्रतिस्पर्धी स्तर पर प्राप्त हुई हैं। ग्वालियर जिले के लिए 3.49 रुपये प्रति यूनिट, इंदौर के लिए 3.40 रुपये प्रति यूनिट तथा भोपाल के लिए 3.78 रुपये प्रति यूनिट की दर तय हुई है।

क्या है RESCO मॉडल?

रेस्को (Renewable Energy Service Company) मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सोलर संयंत्र लगाने में शासन को कोई पूंजीगत निवेश नहीं करना पड़ता। संयंत्र की स्थापना, संचालन और अगले 25 वर्षों तक रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी निजी डेवलपर की होती है। सरकारी विभाग केवल उपयोग की गई बिजली के आधार पर प्रति यूनिट भुगतान करेंगे। इस मॉडल से सरकारी संस्थानों को पहले दिन से बिजली खर्च में बचत मिलने लगेगी और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलेगा लाभ

कार्यक्रम में कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि ग्वालियर जिले में अधिक से अधिक सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि किसानों के लिए सोलर पंप की सुविधा का विस्तार किया जाए ताकि कृषि क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग हो सके। विधायक मोहन सिंह राठौर और विधायक साहब सिंह गुर्जर ने ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, अस्पतालों और अन्य शासकीय भवनों पर भी सोलर संयंत्र लगाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि इससे बिजली की बचत के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में त्रिस्तरीय अनुबंधों का निष्पादन किया गया, जिससे योजना के क्रियान्वयन का मार्ग और अधिक स्पष्ट हो गया है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. प्रदेश के सभी शासकीय भवनों पर एक वर्ष में सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन यदि तय समयसीमा में काम पूरा नहीं हुआ तो जवाबदेही किसकी तय होगी?

2. RESCO मॉडल में 25 वर्षों तक निजी डेवलपर रखरखाव करेगा। यदि बीच में संयंत्र बंद हो जाएं या उत्पादन क्षमता घट जाए तो निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था क्या होगी?

3. जब सरकारी भवनों पर शून्य निवेश से सोलर संयंत्र लगाए जा रहे हैं, तो किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए इसी तरह के आसान मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की क्या योजना है?

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