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| बेमेतरा; जनदर्शन में पहुंचे लोग, अफसरों को लगी सीधी कॉल! कई शिकायतों का मौके पर हुआ फैसला Aajtak24 News |
बेमेतरा -आमजन की समस्याओं को सीधे सुनकर उनके त्वरित समाधान के उद्देश्य से आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में प्रशासन ने मौके पर कार्रवाई का संदेश देने की कोशिश की। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देश पर सोमवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में अपर कलेक्टर गुड्डू लाल जगत ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं सुनीं। कार्यक्रम के दौरान नागरिकों ने अपनी मांगों, शिकायतों और व्यक्तिगत समस्याओं से जुड़े आवेदन प्रस्तुत किए। जनदर्शन में कुल 40 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से लेकर राजस्व और ग्रामीण सुविधाओं से जुड़े कई मामले शामिल रहे।
अपर कलेक्टर ने आवेदनों को सुनने के साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों से सीधे दूरभाष पर संपर्क किया और कई मामलों में अधिकारियों को मौके पर बुलाकर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन के अनुसार कुछ मामलों का समाधान उसी समय कर दिया गया, जबकि अन्य गंभीर और जांच योग्य प्रकरणों को आगे की कार्रवाई के लिए दर्ज किया गया। जनदर्शन में निराश्रित पेंशन, वृद्धा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, बैटरी संचालित ट्रायसायकल, कटा हुआ रकबा जोड़ने, खाद गड्ढा हटाने और आम रास्ता खुलवाने जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए। कई आवेदनों में ग्रामीण और सामाजिक स्तर की बुनियादी समस्याएं भी शामिल रहीं।
प्रशासन ने गंभीर प्रकृति के मामलों को टीएल पंजी में दर्ज कर संबंधित विभागों को समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही आवेदकों को उनकी शिकायतों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया। जनदर्शन कार्यक्रम को प्रशासन ने नागरिकों और शासन के बीच सीधे संवाद का माध्यम बताते हुए विभागों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों को अनावश्यक रूप से आगे न बढ़ाया जाए और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जनदर्शन में कई मामलों का मौके पर समाधान हो गया, तो क्या ये समस्याएं पहले विभागीय स्तर पर अनावश्यक रूप से लंबित रखी गई थीं?
- 40 आवेदन आए, लेकिन क्या प्रशासन सार्वजनिक रूप से बताएगा कि इनमें से कितने मामलों का वास्तव में समय-सीमा में अंतिम निराकरण हुआ?
- अगर नागरिकों को पेंशन, रास्ता और आवास जैसी बुनियादी समस्याओं के लिए कलेक्ट्रेट तक आना पड़ रहा है, तो स्थानीय स्तर की शिकायत निवारण व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
