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| राजनांदगांव; सरकारी शिविर या उम्मीदों का दरबार? 12 पंचायतों के 728 आवेदन लेकर गांव पहुंचा प्रशासन Aajtak24 News |
राजनांदगांव - सुशासन तिहार 2026 के तहत प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों तक योजनाओं की पहुंच बढ़ाने और समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया। जनपद पंचायत डोंगरगढ़ के ग्राम पंचायत पलांदुर में आयोजित इस शिविर में 12 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए और अपनी समस्याएं व मांगें प्रशासन के सामने रखीं। शिविर में ग्राम पंचायत पलांदुर, भानपुरी, कातलवाही, पारागांवखुर्द, पारागांवकला, पेंड्री, सलटिकरी, मुसराकला, आलीवारा, कसारी, कोलिहापुरी और छीपा क्षेत्र के ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान कुल 728 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 714 मांग संबंधी और 14 शिकायत से जुड़े आवेदन दर्ज किए गए। प्रशासन ने दावा किया कि सभी आवेदनों का समयबद्ध और प्रभावी निराकरण किया जाएगा।
शिविर में विभिन्न विभागों की ओर से पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ भी दिया गया। जनपद पंचायत डोंगरगढ़ द्वारा 7 हितग्राहियों को राशन कार्ड और 4 हितग्राहियों को जॉब कार्ड वितरित किए गए। मत्स्य विभाग ने दो हितग्राहियों को आइस बॉक्स और मछली जाल उपलब्ध कराया, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान कार्ड और श्रम विभाग ने ई-श्रम कार्ड वितरित किए। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग ने गोदभराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम आयोजित कर पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े संदेश दिए।
शिविर में प्रशासनिक व्यवस्था को बहु-विभागीय स्वरूप दिया गया। राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जल संसाधन, विद्युत, वन, परिवहन, मत्स्य, खाद्य सहित कुल 19 विभागों के स्टॉल लगाए गए, जहां ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी और आवेदन संबंधी सहायता उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम में किरण साहू, लता अजय सिन्हा, एम भार्गव सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 728 आवेदन लेने के बाद क्या प्रशासन सार्वजनिक रूप से बताएगा कि कितने आवेदनों का वास्तव में समय सीमा में समाधान हुआ?
- यदि ग्रामीणों को राशन कार्ड, जॉब कार्ड और आयुष्मान कार्ड शिविर में देना पड़ा, तो क्या पहले नियमित व्यवस्था इन लोगों तक नहीं पहुंच पाई थी?
- 19 विभागों के स्टॉल लगाने के बावजूद केवल 14 शिकायतें दर्ज हुईं—क्या ग्रामीणों को शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और अधिकारों की पर्याप्त जानकारी दी गई थी?
