ग्वालियर; जन-सुनवाई में राजस्व, बिजली, नगर निगम और पुलिस से जुड़ी शिकायतों की भरमार Aajtak24 News

ग्वालियर; जन-सुनवाई में राजस्व, बिजली, नगर निगम और पुलिस से जुड़ी शिकायतों की भरमार Aajtak24 News

ग्वालियर - कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जन-सुनवाई एक बार फिर आम लोगों की उम्मीदों का बड़ा केंद्र बनी। जिलेभर से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे 135 नागरिकों ने प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। कलेक्टर रुचिका चौहान ने अपने चेम्बर में नागरिकों को बुलाकर उनकी शिकायतें सुनीं, जबकि सभागार में प्रशासनिक अधिकारियों ने अलग-अलग मामलों पर सुनवाई कर निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। जन-सुनवाई में सबसे ज्यादा मामले राजस्व, नगर निगम, बिजली और पुलिस विभाग से जुड़े सामने आए। जमीन विवाद, बुनियादी सुविधाओं की कमी, बिजली संबंधी शिकायतें और प्रशासनिक कार्रवाई में देरी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। प्रशासन ने जमीन संबंधी प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए सभी एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए। वहीं नगर निगम क्षेत्र से जुड़ी शिकायतों पर भी अधिकारियों को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

इस दौरान प्रशासन ने मानवीय पहल दिखाते हुए मदद की उम्मीद लेकर पहुंचे जरूरतमंद लोगों के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था भी कराई। इससे कुछ जरूरतमंद परिवारों को तत्काल राहत मिली। हालांकि आंकड़ों ने कई सवाल भी खड़े किए। कुल 135 लोग जन-सुनवाई में पहुंचे लेकिन इनमें से केवल 35 आवेदन ही दर्ज किए गए, जबकि शेष आवेदनों को विभागीय अधिकारियों को आवश्यक टीप के साथ समय-सीमा में निराकरण के लिए भेजा गया। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर होंगी कि ये सुनवाई फाइलों तक सीमित रहती है या लोगों को वास्तव में समाधान मिलता है। जन-सुनवाई प्रशासन और जनता के बीच भरोसे का माध्यम मानी जाती है, लेकिन इसकी सफलता का असली पैमाना आवेदन की संख्या नहीं बल्कि शिकायतों का धरातल पर समाधान होता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 135 लोग जन-सुनवाई में पहुंचे, लेकिन केवल 35 आवेदन ही दर्ज हुए—बाकी आवेदनों को दर्ज न करने का आधार क्या था और क्या उनकी ट्रैकिंग की कोई सार्वजनिक व्यवस्था है?
  2. हर जन-सुनवाई में राजस्व और नगर निगम की शिकायतें बड़ी संख्या में आती हैं—क्या यह विभागीय स्तर पर नियमित समाधान व्यवस्था के कमजोर होने का संकेत नहीं है?
  3. जन-सुनवाई में दिए गए निर्देशों का फॉलोअप कैसे होगा, और कितने पुराने मामलों का वास्तविक निराकरण हुआ—क्या प्रशासन इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा?

Post a Comment

Previous Post Next Post