| रीवा-मऊगंज के खरीदी केंद्रों में 'अन्नदाता' से खुली लूट, अधिकारियों की नाक के नीचे पनप रहा अरबों का घोटाला Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - रीवा और नवगठित मऊगंज जिले के सहकारिता खरीदी केंद्रों में इन दिनों भ्रष्टाचार और अन्नदाताओं के शोषण का खुला खेल चल रहा है। एक तरफ जहां ईमानदार किसान अपनी गाढ़े पसीने की कमाई को कौड़ियों के दाम और तौल में हेराफेरी के कारण गंवाने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर बिचौलियों, व्यापारियों और भ्रष्ट अधिकारियों का गठजोड़ फल-फूल रहा है। सूत्रों और दैनिक समाचार पत्रों की रिपोर्टों के अनुसार, यदि उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो यहां करोड़ नहीं, बल्कि अरबों रुपये का महाघोटाला उजागर हो सकता है।
तौल में हेराफेरी: 50 किलो की जगह 50.400 किलो की खरीदी
सहकारिता केंद्रों पर नियमों को ताक पर रखकर किसानों के साथ सीधे तौर पर लूट की जा रही है। तय मापदंड के अनुसार बोरे में 50 किलो 100 ग्राम अनाज लिया जाना चाहिए, लेकिन कई केंद्रों पर अन्नदाताओं से 50 किलो 400 ग्राम तक गेहूं जबरन तौला जा रहा है। प्रति बोरी 300 ग्राम से ज्यादा की यह अवैध कटौती सीधे तौर पर किसानों की जेब पर डाका है।
रात के अंधेरे में 'मिट्टी युक्त' गेहूं की सेटिंग और वेयरहाउस सप्लाई
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, कुछ रसूखदार व्यापारियों और दलालों के गेहूं में 20 से 30 प्रतिशत तक मिट्टी, कंकड़ और अन्य अशुद्धियों का मिश्रण है। दिन के उजाले में जिस अनाज को रिजेक्ट कर दिया जाना चाहिए, खरीदी केंद्रों के कर्मचारी मोटी रकम (रिश्वत) लेकर उसी घटिया अनाज को रात के अंधेरे में तौल देते हैं। आनन-फानन में इस अमानक अनाज को बिना किसी कड़े निरीक्षण के सीधे वेयरहाउस (गोदामों) में भेज दिया जाता है।भ्रष्टाचार के मुख्य केंद्र: जिले की बरहदी समिति, बदवार, दुवारी, पाती, टीकर, और गुढ़ समेत कई सहकारी समितियों के खरीदी केंद्र इस समय भ्रष्टाचार के मुख्य गढ़ बने हुए हैं।
वेयरहाउसों में 'एक्सटेंशन वजन' और लूज सामग्री का खेल
मामला सिर्फ रीवा तक सीमित नहीं है, बल्कि मऊगंज और अलीगढ़ क्षेत्रों में संचालित हो रहे नवीन भंडारों में भी स्थिति बेहद गंभीर है। वेयरहाउसों में भंडारीकृत किए जा रहे गेहूं और धान के स्टॉक की वास्तविक जांच नहीं की जा रही है। गोदामों में 'एक्सटेंशन वजन' (बढ़ा हुआ वजन) और लूज सामग्री के नाम पर भारी अनियमितता है। इस पूरे खेल में:
खरीदी केंद्र के कर्मचारी
बिचौलिए और दलाल
वेयरहाउस प्रबंधन
और मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार निरीक्षण टीमें
इन सभी की आपसी साठगांठ से इस घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है।
रसूखदारों के गोदाम, जांच से कतरा रहे अधिकारी
प्रशासनिक शिथिलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि रीवा और मऊगंज जिलों में अधिकांश गोदाम बड़े नेताओं, रसूखदार अधिकारियों और रसूख वाले लोगों के हैं। यही वजह है कि स्थानीय स्तर की जांच टीमें वहां कदम रखने से भी कतराती हैं। दैनिक समाचार पत्रों द्वारा बार-बार इस गंभीर मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है।
शासन के मापदंडों और गुणवत्ता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। यदि आज भी शासन और प्रशासन निष्पक्षता से इन गोदामों और केंद्रों की सघन जांच करवा दे, तो दूध का दूध और पानी का पानी होना तय है। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश सरकार इन भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसती है या अन्नदाता यूं ही लुटता रहेगा।