निवाड़ी में किसानों को बताया गया ‘प्राकृतिक खेती’ का नया गणित Aajtak24 News

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निवाड़ी - जिले के ग्राम बासवान में किसान जागरूकता रथ के माध्यम से किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों और प्राकृतिक खेती के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उपसंचालक कृषि विभाग हरीश मालवीय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है। इसका असर उत्पादन, भूमि की गुणवत्ता और किसानों की लागत पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर मिट्टी की सेहत को सुधारा जा सकता है और खेती की लागत में भी बड़ी कमी लाई जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले अधिकांश तत्व स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे किसानों का खर्च घटता है। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों की जानकारी भी दी गई। इसमें बीज उपचार के लिए बीजामृत, फसल वृद्धि के लिए जीवामृत तथा कीट नियंत्रण के लिए नीम अस्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक घोल तैयार करने की प्रक्रिया समझाई गई।

अधिकारियों ने बताया कि खेत में पुआल और फसल अवशेष से आच्छादन करने पर नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवार की समस्या भी कम होती है। इससे सिंचाई और श्रम लागत में कमी आती है। उपसंचालक श्री मालवीय ने दावा किया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उत्पादन लागत 60 से 70 प्रतिशत तक कम हो सकती है और बाजार में जैविक उपज का मूल्य भी अधिक मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान और प्रशिक्षण सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही है।

कृषकों से अपील की गई कि वे शुरुआत में कम से कम एक एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती का प्रयोग करें और धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाएं। कृषि विभाग ने इच्छुक किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. प्राकृतिक खेती से लागत कम होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या सरकार यह गारंटी दे सकती है कि किसानों की उपज और आमदनी में कोई गिरावट नहीं आएगी?
  2. जैविक उत्पादों को बाजार में अधिक कीमत मिलने की बात कही जाती है, लेकिन ग्रामीण किसानों को ऐसा बाजार उपलब्ध कराने के लिए क्या ठोस व्यवस्था है?
  3. सरकार वर्षों से रासायनिक खादों पर सब्सिडी देती रही है, तो अब प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए क्या उसी स्तर की आर्थिक सहायता और खरीद नीति तैयार की जाएगी?

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