सारंगढ़-बिलाईगढ़; मिट्टी से निकली कला बदल देगी किस्मत! बैगीनडीह बनेगा देश का नया ‘शिल्पग्राम Aajtak24 News

मिट्टी से निकली कला बदल देगी किस्मत! बैगीनडीह बनेगा देश का नया ‘शिल्पग्राम Aajtak24 News

सारंगढ़-बिलाईगढ़ - जिले का ग्राम बैगीनडीह अब देश के बड़े शिल्पग्रामों में अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। पारंपरिक बेलमेटल कला और झारा शिल्प के लिए प्रसिद्ध इस गांव को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने रविवार को बैगीनडीह का आकस्मिक निरीक्षण कर वहां के महिला और पुरुष शिल्पकारों द्वारा तैयार की जा रही कलात्मक मूर्तियों और हस्तशिल्प उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने शिल्पकारों की मेहनत और पारंपरिक कला की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की बात कही।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र शिल्पकारों को प्रधानमंत्री आवास योजना और शौचालय योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिया जाए। महिला शिल्पकारों को बिहान योजना से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा जिला अंत्यावसायी विकास निगम को निर्देश दिए गए कि शिल्पकारों को रोजगारमूलक ऋण और 10 हजार रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाए ताकि वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें। प्रशासन के अनुसार बैगीनडीह को शिल्पग्राम के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से चल रही है। इस परियोजना के लिए छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा लगभग 3 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।

योजना के तहत करीब 2 करोड़ 25 लाख रुपये की मशीनों की खरीदी की जाएगी, जबकि लगभग 50 लाख रुपये की लागत से शिल्प वर्कशॉप भवन और दुकानें बनाई जाएंगी। प्रशासन का कहना है कि भवन तैयार होने के बाद शिल्पकार एक ही परिसर में मूर्तियां बनाएंगे और उनकी बिक्री भी कर सकेंगे। साथ ही उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री की भी योजना है। बैगीनडीह के शिल्पकार पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। गांव की शिल्पकार हीराबाई झरेखा को वर्ष 2023 के राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं शिल्पकार मिनकेतन को भी राज्य स्तर पर सम्मान मिला है। प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना न केवल पारंपरिक कला को संरक्षित करेगी, बल्कि गांव के शिल्पकारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. शिल्पग्राम परियोजना के लिए करोड़ों रुपये मंजूर होने के बावजूद पिछले दो वर्षों में जमीनी स्तर पर विकास कार्य धीमे क्यों रहे?
  2. क्या प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि मशीनों और निर्माण कार्यों में स्थानीय शिल्पकारों की जरूरतों को प्राथमिकता मिले, न कि केवल ठेकेदारी मॉडल हावी हो जाए?
  3. ऑनलाइन बिक्री और बड़े बाजारों तक पहुंच की बात हो रही है, लेकिन क्या शिल्पकारों को डिजिटल प्रशिक्षण और स्थायी मार्केटिंग सपोर्ट भी दिया जाएगा या योजना केवल घोषणा बनकर रह जाएगी?

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