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| रायसेन; फाइलों में अटकी जनता की उम्मीदें! कलेक्टर विश्वकर्मा बोले- अब हर शिकायत का तय समय में होगा हिसाब Aajtak24 News |
रायसेन - जिले में लंबित शिकायतों, धीमी प्रशासनिक प्रक्रिया और योजनाओं के अधूरे क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन अब सख्त मूड में नजर आ रहा है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित टीएल बैठक में कलेक्टर अरूण कुमार विश्वकर्मा ने सीएम हेल्पलाइन, आरसीएमएस पोर्टल, जनसुनवाई, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेयजल व्यवस्था और मानसून तैयारियों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों की विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब लापरवाही और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक की शुरुआत आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों की समीक्षा से हुई। कलेक्टर ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए कि पोर्टल पर दर्ज मामलों का समय सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री कार्य की समीक्षा करते हुए शेष लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की मॉनीटरिंग नियमित रूप से करने को कहा।
सीएम हेल्पलाइन की विभागवार समीक्षा के दौरान कई विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली सामने आई। खाद्य, शहरी विकास, ऊर्जा, स्वास्थ्य, पीएचई और महिला बाल विकास विभाग को लंबित शिकायतों के निराकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। नॉन-अटेंडेंट शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने कहा कि जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करना गंभीर लापरवाही माना जाएगा। जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों के निराकरण में देरी पर भी कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आम नागरिक उम्मीद लेकर प्रशासन तक पहुंचता है, लेकिन समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने से शासन की छवि प्रभावित होती है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि हर आवेदन का समय पर निराकरण हो और संबंधित आवेदक को कार्रवाई की जानकारी भी दी जाए।
बैठक में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की समीक्षा के दौरान किसानों को भुगतान में तेजी लाने और उपज के सुरक्षित भंडारण के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर बारदाने की कमी नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की समीक्षा करते हुए उन्होंने जनपद सीईओ को निर्देश दिए कि जिन हितग्राहियों को तीसरी किस्त मिल चुकी है, उनके आवास जल्द पूर्ण कराए जाएं। समग्र सीडिंग कार्य में भी प्रशासनिक सुस्ती सामने आई। कलेक्टर ने बताया कि अब भी 21 हजार 523 नागरिकों की समग्र सीडिंग लंबित है, जिसे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। वहीं “एक बगिया मां के नाम”, धरती आबा अभियान और पंचायत भवन निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई।
गर्मी और आगामी मानसून को देखते हुए पेयजल और आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने और खराब नल-जल योजनाओं को जल्द सुधारने के निर्देश दिए गए। नगरीय निकायों को मानसून से पहले नालियों की सफाई कराने और जलभराव रोकने की तैयारी करने को कहा गया।
कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि पिछले 10 वर्षों में जिन तालाबों और डेमों में दुर्घटनाएं हुई हैं, उनकी सूची तैयार कर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं। साथ ही बारिश में पहुंचविहीन होने वाले गांवों, पुल-पुलियों और रपटों की जानकारी अपडेट रखने को कहा गया। मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग को दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ कमल सोलंकी, अपर कलेक्टर मनोज उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई के मामलों का समय पर निराकरण नहीं हो रहा, तो क्या प्रशासन यह माने कि विभागीय जवाबदेही सिर्फ बैठकों तक सीमित रह गई है?
- 21 हजार से ज्यादा समग्र सीडिंग अब भी लंबित है, तो क्या शासन की कई योजनाओं से वंचित हो रहे लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी?
- हर साल मानसून से पहले नालियों की सफाई और आपदा प्रबंधन की समीक्षा होती है, फिर भी बारिश में जलभराव और हादसे क्यों होते हैं? क्या पिछले वर्षों की लापरवाही पर किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई?
