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| छतरपुर; कलेक्टर ने गांव-गांव पहुंचकर फॉर्मर रजिस्ट्री में तेजी लाने के दिए सख्त निर्देश Aajtak24 News |
छतरपुर - छतरपुर में राजस्व व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। मंगलवार को कलेक्टर ने कलेक्ट्रेट से वीसी के माध्यम से जिले के राजस्व अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली, जिसमें फॉर्मर रजिस्ट्री, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और जनगणना से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की प्रगति पर गहन चर्चा की गई।
कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि फॉर्मर रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को केवल दफ्तरों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि हर गांव में जाकर प्रगति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जहां किसानों की अधिक आवाजाही होती है, जैसे उपार्जन केंद्र, वहां विशेष कैंप लगाकर फॉर्मर आईडी बनवाई जाए।
बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी एसडीएम अपने-अपने क्षेत्रों में कैंप आयोजित करवाकर कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करेंगे ताकि फॉर्मर रजिस्ट्री का काम तेजी से पूरा हो सके। छतरपुर नगर, ग्रामीण क्षेत्र, बक्सवाहा और घुवारा में विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
नामांतरण और सीमांकन मामलों पर भी सख्त रुख
कलेक्टर ने नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए साफ कहा कि किसी भी स्थिति में फाइलें लंबित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने संबंधित तहसील और नायब तहसीलदारों को निर्देश दिए कि:
- नामांतरण मामलों का समयसीमा में निपटारा हो
- सीमांकन प्रकरणों में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी
- बंटवारे के मामलों में पारदर्शिता और तेजी लाई जाए
जनगणना और HLB कार्यों पर भी फोकस
बैठक में जनगणना से जुड़े मकानों के सूचीकरण (HLB) कार्यों की भी समीक्षा की गई।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि:
- सभी लंबित HLB कार्य जल्द पूरे किए जाएं
- एसडीएम स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग हो
- अतिरिक्त कर्मचारियों की मदद लेकर कार्य में तेजी लाई जाए
इस दौरान गौरिहार तहसील द्वारा शत-प्रतिशत HLB कार्य पूरा करने पर टीम की सराहना भी की गई और अन्य तहसीलों को इसी मॉडल पर काम करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासनिक सख्ती का संदेश
कलेक्टर ने बैठक में साफ संकेत दिए कि अब लापरवाही या धीमी प्रगति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी राजस्व अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर कार्यों की समीक्षा करें और जमीनी स्तर पर सुधार सुनिश्चित करें।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- फॉर्मर रजिस्ट्री की धीमी प्रगति के लिए क्या प्रशासनिक सिस्टम की जवाबदेही तय की जाएगी या सिर्फ फील्ड अधिकारियों पर कार्रवाई तक मामला सीमित रहेगा?
- जब उपार्जन केंद्रों पर कैंप लगाने की जरूरत पड़ रही है, तो क्या यह स्वीकार किया जा रहा है कि अब तक योजना ग्रामीण स्तर तक सही तरीके से लागू नहीं हो सकी?
- नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के इतने लंबित मामलों के लिए क्या कोई टाइम-बाउंड ऑडिट कराया जाएगा ताकि वास्तविक जिम्मेदारी तय हो सके?
