| बीजापुर; सलाखों के पीछे खुली नई किताब: उप जेल में ‘उल्लास’ से कैदियों के हाथों में आई कलम Aajtak24 News |
बीजापुर - बीजापुर उप जेल में इस बार चर्चा सुरक्षा व्यवस्था की नहीं, बल्कि शिक्षा की नई शुरुआत की हो रही है। जेल की दीवारों के भीतर ऐसे बंदियों के लिए एक नई पहल शुरू की गई है जो अब तक शिक्षा से दूर रहे। “उल्लास साक्षरता कार्यक्रम” के तहत असाक्षर कैदियों और बंदियों के लिए नवसाक्षरता अभियान का शुभारंभ किया गया। कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि बंदियों को समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने की दिशा में अवसर उपलब्ध कराना बताया गया है। कार्यक्रम जिला शिक्षा अधिकारी श्री लखनलाल धनेलिया की उपस्थिति में आयोजित किया गया।
अभियान के दौरान बंदियों को अध्ययन सामग्री के रूप में पेन, पेंसिल, पुस्तकें और व्हाइटबोर्ड उपलब्ध कराए गए। जेल परिसर में ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया जिससे बंदियों में सीखने की रुचि बढ़े और वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि शिक्षा केवल जानकारी का माध्यम नहीं बल्कि जीवन की दिशा बदलने की क्षमता रखती है। उनका कहना था कि शासन की मंशा है कि समाज का कोई भी व्यक्ति शिक्षा से वंचित न रहे और जेल में रह रहे असाक्षर बंदियों तक भी यह अवसर पहुंचे।
उप जेल प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बंदियों को नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया और कहा कि साक्षरता केवल अक्षर ज्ञान नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और सामाजिक पुनर्वास का माध्यम बन सकती है। कार्यक्रम के दौरान बंदियों में सीखने को लेकर उत्साह भी दिखाई दिया। यह पहल ऐसे समय में शुरू हुई है जब सुधारात्मक न्याय व्यवस्था में केवल दंड नहीं बल्कि पुनर्वास और व्यवहार परिवर्तन को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह अभियान केवल सामग्री वितरण तक सीमित रहता है या वास्तव में बंदियों के जीवन में स्थायी बदलाव ला पाता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. इस अभियान के तहत कितने असाक्षर बंदियों की पहचान की गई है और कितनों को तय समयसीमा में साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है?
2. क्या साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने वाले बंदियों के लिए आगे कौशल विकास, प्रमाणन या रोजगार से जुड़ने की कोई व्यवस्था भी बनाई गई है?
3. शिक्षा कार्यक्रम की सफलता को केवल उपस्थिति से नहीं बल्कि वास्तविक सीखने के परिणामों से कैसे मापा जाएगा, और इसकी स्वतंत्र समीक्षा कौन करेगा?