| बीजापुर; 501 आवेदन, 11 पंचायतें और एक सवाल—शिविर में मिली राहत या फिर शुरू हुई नई इंतजार की कतार? Aajtak24 News |
बीजापुर - जिले के भोपालपटनम ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत पामगल में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी और प्रशासनिक सक्रियता का केंद्र बनकर उभरा। 18 मई को आयोजित इस शिविर में क्षेत्र की 11 ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और अपनी मांगों, शिकायतों तथा योजनाओं से जुड़ी समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा। शिविर में अलग-अलग विभागों ने जनहितकारी योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाए, जहां ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ मौके पर आवेदन स्वीकार किए गए और कई मामलों में तत्काल कार्रवाई भी की गई। प्रशासन का उद्देश्य लोगों को कार्यालयों के बजाय गांव स्तर पर सेवाएं उपलब्ध कराना बताया गया।
समाधान शिविर के दौरान मांग एवं शिकायत से जुड़े कुल 501 आवेदन प्राप्त हुए। प्रशासन के अनुसार इन आवेदनों के निराकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिविर में शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, कृषि, उद्यानिकी और मत्स्य विभाग सहित कई विभागों ने पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया। ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए शिविर में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जहां लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श दिया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया।
महिला एवं बाल विकास विभाग की गतिविधियां शिविर का प्रमुख आकर्षण रहीं। विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोद भराई कर पोषण और मातृ स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई, वहीं छोटे बच्चों के लिए अन्नप्राशन कार्यक्रम आयोजित कर परिवारों को शुरुआती पोषण के महत्व से अवगत कराया गया। सुशासन तिहार के तहत आयोजित यह शिविर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सीधे संवाद का मंच बना, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि शिविर में दर्ज 501 आवेदनों का समाधान कितनी तेजी और प्रभावशीलता से जमीन पर दिखाई देता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. शिविर में 501 आवेदन प्राप्त हुए—क्या प्रशासन इनके निराकरण की सार्वजनिक समयसीमा और विभागवार प्रगति रिपोर्ट जारी करेगा?
2. मौके पर लाभ वितरण और स्वास्थ्य जांच हुई, लेकिन क्या लाभ पाने वाले हितग्राहियों का बाद में फॉलोअप और प्रभाव मूल्यांकन भी किया जाएगा?
3. यदि समस्याओं के समाधान के लिए शिविर जरूरी हैं, तो क्या यह माना जाए कि नियमित विभागीय व्यवस्था आम नागरिकों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रही है?