| दुर्ग; 501 शिकायतें, 283 समाधान… सुशासन का शिविर या सिस्टम की लंबित कहानी? Aajtak24 News |
दुर्ग - सुशासन तिहार के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में प्रशासन ने ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे मौके पर सुनने और समाधान देने का प्रयास किया। जनपद पंचायत दुर्ग क्षेत्र के ग्राम पंचायत बेलौदी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला में आयोजित इस शिविर में कुल 501 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 283 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया। शिविर में आसपास के कई गांवों—नगपुरा, बोरई, खुरसुल, दमोदा, अंजोरा ढा, ढाबा, भेंड़सर, डांडेसरा, पीपरछेड़ी, गनियारी, चिखली, कोटनी, मोहलई और बेलौदी—के ग्रामीण पहुंचे और विभिन्न विभागों के स्टॉलों पर अपनी समस्याएं और मांगें दर्ज कराईं।
कार्यक्रम में उपस्थित दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने कहा कि शिविर का उद्देश्य नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना और एक ही स्थान पर सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव नहीं है, उनमें आवेदकों को स्पष्ट समयसीमा की जानकारी दी जाए। शिविर में केवल आवेदन नहीं लिए गए, बल्कि कई हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ भी मौके पर दिया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पांच हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपी गई। वहीं मनरेगा के तहत 12 हितग्राहियों को जॉब कार्ड प्रदान किए गए।
इसके अलावा राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत दो हितग्राहियों के खातों में 20-20 हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई। प्रशासन का दावा है कि शेष लंबित आवेदनों का निराकरण निर्धारित समयसीमा में किया जाएगा। हालांकि शिविर के आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि आधे से अधिक मामलों का समाधान मौके पर नहीं हो पाया, जिससे अब निगाहें लंबित मामलों की वास्तविक प्रगति पर रहेंगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. 501 आवेदनों में से 218 आवेदन लंबित रहे—क्या इनके निराकरण की सार्वजनिक समयसीमा और ट्रैकिंग व्यवस्था बनाई गई है?
2. पिछले सुशासन शिविरों में प्राप्त आवेदनों में से कितने मामलों का वास्तव में स्थायी समाधान हुआ और कितने दोबारा शिकायत के रूप में लौटे?
3. शिविरों में योजनाओं का लाभ वितरण हो रहा है, लेकिन क्या प्रशासन लाभार्थियों का बाद का सत्यापन भी करता है कि सेवा और राशि का वास्तविक उपयोग हुआ या नहीं?