| सक्ती; सरकार गांव पहुंची या उम्मीदें? चुरतेली के समाधान शिविर में उमड़ी भीड़, योजनाओं का मिला सीधा लाभ Aajtak24 News |
सक्ती - सुशासन तिहार 2026 के तहत डभरा विकासखंड की ग्राम पंचायत चुरतेली में आयोजित जनसमस्या समाधान शिविर में ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और आमजन की समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में 19 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए और अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। क्लस्टर चुरतेली के अंतर्गत चुरतेली, चुरतेला, सुखदा, बांधापाली, बरतुंगा, देवरघटा, घिवरा, गोबरा, कांसा, कटौद, कुसमुल, लटियाडीह, कोटमी, निमोही, कबारीपाली, केकराभांठ, सिंघितराई, बाड़ादरहा एवं टुण्ड्री सहित विभिन्न गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी शिकायतें और मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए।
शिविर में प्रशासन द्वारा ऐसे आवेदनों का मौके पर निराकरण किया गया जिनका तत्काल समाधान संभव था, जबकि शेष मामलों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित विभागों को भेजा गया। ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया कि उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान पात्र हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया गया। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं की जानकारी देकर लोगों को पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और मिलने वाले लाभों के बारे में जागरूक किया।
शिविर में स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। वहीं महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, कृषि, उद्यान, पशुधन विकास, सहकारिता, शिक्षा, राजस्व, आवास, श्रम, जल संसाधन, बिजली और पंचायत विभाग सहित कई विभागों ने स्टॉल लगाकर सेवाएं उपलब्ध कराईं। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही। प्रशासन ने इसे शासन और ग्रामीणों के बीच संवाद मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- शिविर में बड़ी संख्या में आवेदन लिए गए, लेकिन कितने आवेदनों का मौके पर समाधान हुआ और शेष के लिए स्पष्ट समयसीमा क्या तय की गई है?
- यदि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहले से पहुंच रहा है, तो फिर इतने बड़े स्तर पर जनसमस्या समाधान शिविरों की जरूरत क्यों पड़ रही है?
- क्या शिविरों में लाभ वितरण के बाद यह भी मॉनिटर किया जाएगा कि हितग्राहियों को योजनाओं का वास्तविक और स्थायी लाभ मिला या नहीं?