सुकमा; जब मंच नहीं, गांव बना संदेश का माध्यम: तालनार–गुमा में नाटक, गीत और संवाद से पहुंचा सुशासन Aajtak24 News

सुकमा; जब मंच नहीं, गांव बना संदेश का माध्यम: तालनार–गुमा में नाटक, गीत और संवाद से पहुंचा सुशासन Aajtak24 News

सुकमा - जिले के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में अब सरकारी योजनाओं की जानकारी केवल कागजों और बैठकों तक सीमित नहीं रह गई है। जिला प्रशासन ने जनसंपर्क और जनजागरूकता को नए अंदाज में गांवों तक पहुंचाने की पहल की है। इसी कड़ी में छिंदगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत तालनार और गुमा में कला जत्था के माध्यम से विशेष जन-जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस अभियान का उद्देश्य शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत नुक्कड़ नाटक, प्रेरक गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। कला जत्था की टीम ने मनोरंजन के साथ संदेश देने की शैली अपनाते हुए ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, रोजगार और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक प्रस्तुति के कारण लोगों की भागीदारी भी उत्साहजनक रही। कार्यक्रम के दौरान केवल योजनाओं का प्रचार नहीं किया गया, बल्कि प्रशासनिक टीम ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी स्थानीय जरूरतों और समस्याओं को भी सुना। ग्रामीणों ने अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं और चुनौतियों को साझा किया, जिस पर प्रशासन ने समाधान और आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया।

अभियान का समापन सामूहिक सांस्कृतिक प्रस्तुति और नृत्य के साथ हुआ, जिसने पूरे माहौल को उत्साह और सहभागिता से भर दिया। ग्रामीणों ने इस तरह के कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने की मांग भी रखी। यह पहल इस बात का संकेत मानी जा रही है कि दूरस्थ क्षेत्रों में संवाद आधारित प्रशासनिक मॉडल अपनाकर योजनाओं की पहुंच और जनभागीदारी दोनों को मजबूत किया जा सकता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. कला जत्था अभियान के बाद यह कैसे मापा जाएगा कि कितने ग्रामीणों ने वास्तव में योजनाओं का लाभ लेना शुरू किया?

2. जिन समस्याओं को ग्रामीणों ने संवाद के दौरान रखा, उनके समाधान की निगरानी और सार्वजनिक रिपोर्टिंग की व्यवस्था क्या होगी?

3. क्या प्रशासन भविष्य में ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के लिए कोई स्थायी ग्राम-स्तरीय मॉडल तैयार कर रहा है या यह केवल अभियान अवधि तक सीमित रहेगा?

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