सुकमा; 10 पंचायतों के ग्रामीणों की भागीदारी, महिला समूहों को 17.50 लाख की आर्थिक ताकत Aajtak24 News

सुकमा; 10 पंचायतों के ग्रामीणों की भागीदारी, महिला समूहों को 17.50 लाख की आर्थिक ताकत Aajtak24 News

सुकमा - जिले के नक्सल प्रभावित अंचलों में अब विकास और योजनाओं की चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है। कोंटा विकासखंड के एर्राबोर में आयोजित क्लस्टर स्तरीय सुशासन शिविर केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक सशक्तिकरण, महिला नेतृत्व और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का बड़ा मंच बनकर उभरा।कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में 10 पंचायतों—एर्राबोर, गगनपल्ली, मराईगुड़ा, आरगट्टा, मेड़वाही, टेटराई, नागुलगुंडा, मनीकोंटा, दरभागुड़ा और मुलाकिसोली के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। ग्रामीणों की उपस्थिति ने संकेत दिया कि योजनाओं को लेकर लोगों में अपेक्षा और भागीदारी दोनों बढ़ रही हैं।

शिविर की सबसे प्रमुख उपलब्धि महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में दिखाई दी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 5 महिला समूहों को कुल 13.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया। वहीं सूरज समूह एर्राबोर को 4 लाख रुपये का ऋण स्वीकृति पत्र सौंपा गया। इसके अलावा पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण भी प्रदान किया गया। यह पहल केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थानीय स्तर पर गति देने का प्रयास भी मानी जा रही है। जनप्रतिनिधियों ने लाभार्थियों को स्वरोजगार, छोटे उद्यम और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

शिविर का एक प्रेरक पक्ष तब सामने आया जब 5 लखपति दीदियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रशासन का उद्देश्य यह संदेश देना था कि ग्रामीण महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की नई निर्माता भी बन सकती हैं। जिला प्रशासन ने इसे सुशासन तिहार और बस्तर मुन्ने अभियान के जरिए गांवों तक विकास पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रशासन का दावा है कि योजनाओं को अब कागजों से निकालकर सीधे लोगों के जीवन से जोड़ा जा रहा है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. जिन महिला समूहों को ऋण दिया गया है, उनके व्यवसायों की सफलता और ऋण वापसी की निगरानी के लिए क्या स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्र बनाया गया है?

2. “लखपति दीदी” मॉडल को अगले एक वर्ष में 10 पंचायतों से बढ़ाकर पूरे विकासखंड में लागू करने का कोई लक्ष्य और समयसीमा तय की गई है या नहीं?

3. सुशासन शिविरों में लाभ वितरण के बाद कितने हितग्राहियों की वास्तविक आय और रोजगार में बदलाव आया—क्या इसका सार्वजनिक डेटा जारी किया जाएगा?

Post a Comment

Previous Post Next Post