| जगदलपुर; दिल्ली से देहरादून और करनाल से मनाली तक शैक्षणिक दौरे ने छात्रों को दिया नई सोच Aajtak24 News |
जगदलपुर - कृषि शिक्षा अब केवल कक्षा, नोट्स और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रही। बदलते दौर में व्यावहारिक सीख, तकनीकी समझ और राष्ट्रीय संस्थानों से सीधा जुड़ाव ही भविष्य की कृषि शिक्षा की नई दिशा बनता जा रहा है। इसी सोच के साथ कृषि महाविद्यालय जगदलपुर के 90 छात्र-छात्राओं को उत्तर भारत के प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा गया, जहां उन्होंने कृषि, डेयरी, जैव संसाधन, वन अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों को करीब से समझा।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.एस. नेताम के मार्गदर्शन में आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण 14 मई से 23 मई तक चला। बीएससी कृषि तृतीय वर्ष के 90 विद्यार्थियों को पांच प्राध्यापकों के नेतृत्व में चार समूहों में विभाजित कर यह अध्ययन यात्रा कराई गई। उद्देश्य स्पष्ट था—पुस्तकीय ज्ञान को व्यवहारिक अनुभव से जोड़ना और विद्यार्थियों में उद्यमिता तथा रोजगार आधारित सोच विकसित करना। इस यात्रा का रूट जगदलपुर से शुरू होकर रायपुर, दिल्ली, करनाल, मनाली और देहरादून तक पहुंचा। छात्रों ने देश के प्रतिष्ठित कृषि और अनुसंधान संस्थानों की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा।
दिल्ली में विद्यार्थियों ने भारतीय कृषि अनुसंधान से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों का अध्ययन किया, जहां उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों, जैव विविधता संरक्षण और भविष्य की कृषि चुनौतियों पर जानकारी दी गई। यहां छात्रों ने कृषि अनुसंधान को केवल प्रयोगशाला नहीं बल्कि किसानों और उत्पादन से जुड़ी व्यवस्था के रूप में समझा। इसके बाद करनाल स्थित डेयरी अनुसंधान संस्थान में छात्रों ने पशुधन प्रबंधन, उन्नत नस्लों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों को समझा। विद्यार्थियों ने साहीवाल, थारपारकर, करन स्विस, करन फ्रिज नस्लों तथा मुर्राह भैंसों का अध्ययन किया। कृत्रिम गर्भाधान और आधुनिक डेयरी विज्ञान से जुड़े प्रयोगों ने छात्रों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
इसी दौरान विद्यार्थियों ने गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान का भी भ्रमण किया, जहां फसल विकास, प्रसंस्करण और उत्पादन श्रृंखला को विस्तार से समझा गया। हिमाचल प्रदेश पहुंचकर छात्रों ने कुल्लू क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र और उद्यानिकी संस्थानों का अवलोकन किया। यहां पर्वतीय कृषि मॉडल, स्थानीय फसल प्रणाली और उत्पादन तकनीकों का व्यावहारिक अध्ययन किया गया। छात्रों ने स्थानीय बाजारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी समझने का प्रयास किया। इसके बाद उत्तराखंड में वन अनुसंधान और उच्च शिक्षा संस्थानों का दौरा छात्रों के लिए नई प्रेरणा लेकर आया। यहां विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, अनुसंधान और राष्ट्रीय स्तर पर करियर निर्माण के अवसरों की जानकारी दी गई।
यात्रा से लौटे विद्यार्थियों ने इसे केवल भ्रमण नहीं बल्कि जीवन और करियर को देखने का नया नजरिया बताया। छात्रों के अनुसार इस अनुभव ने उन्हें कक्षा के बाहर सीखने, तकनीक को समझने और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर दिया। यह शैक्षणिक भ्रमण इस बात का संकेत भी है कि यदि ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के छात्रों को सही अवसर और एक्सपोजर मिले, तो वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. इस शैक्षणिक भ्रमण के बाद छात्रों के सीखने के परिणामों को मापने के लिए क्या कोई मूल्यांकन या फॉलोअप मॉडल तैयार किया गया है?
2. क्या इन राष्ट्रीय संस्थानों के साथ भविष्य में इंटर्नशिप, रिसर्च या छात्र विनिमय कार्यक्रम शुरू करने की कोई योजना है?
3. क्या ऐसे भ्रमणों का लाभ केवल चयनित छात्रों तक सीमित रहेगा या भविष्य में कृषि महाविद्यालय के सभी विद्यार्थियों के लिए इसे संस्थागत रूप दिया जाएगा?