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| मुरैना; जहां योजनाएं नहीं पहुंचीं, वहां प्रशासन पहुंचा: ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान में सहरिया बसाहटों तक दस्तक Aajtak24 News |
मुरैना - विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह सहरिया समुदाय तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मुरैना जिले में “जन भागीदारी - सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत प्रशासन उन क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है जहां अक्सर योजनाओं की पहुंच सीमित मानी जाती रही है।भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशों के तहत यह अभियान 18 मई से 25 मई 2026 तक जिले की 42 चिन्हित सहरिया बसाहटों में संचालित किया जा रहा है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने बताया कि उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना है।
पंचायत स्तर पर जनसुनवाई और मौके पर समाधान
अभियान के तहत 21 से 23 मई तक पंचायत भवनों में विशेष जनसुनवाई आयोजित की गई, जहां नागरिकों की समस्याओं को सुनकर मौके पर समाधान देने की व्यवस्था की गई। प्रशासन का फोकस केवल आवेदन लेने तक सीमित नहीं रखा गया बल्कि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से वास्तविक रूप से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
एक ही शिविर में कई सेवाएं
इन शिविरों में जाति, निवास और आय प्रमाण-पत्र, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पेंशन, बैंक खाते और वनाधिकार पट्टों जैसी कई सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिले के 18 विभागों के अधिकारी और कर्मचारी इसमें शामिल होकर राजस्व प्रकरणों और अन्य लंबित आवेदनों के निराकरण का प्रयास कर रहे हैं।
परिवारवार सर्वे और शत-प्रतिशत लक्ष्य
अभियान के तहत परिवारवार सर्वेक्षण कर शून्य पेंडेंसी और शत-प्रतिशत सैचुरेशन का लक्ष्य रखा गया है, ताकि कोई पात्र परिवार योजनाओं से बाहर न रहे। सबलगढ़ जनपद की कई ग्राम पंचायतों की सहरिया बसाहटों में आयोजित शिविरों में अब तक 23 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 17 को स्वीकृति दी जा चुकी है जबकि शेष आवेदन प्रक्रियाधीन बताए गए हैं।
स्वास्थ्य और सामाजिक गतिविधियां भी शामिल
अभियान के दौरान स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता अभियान और ग्राम सभाओं का भी आयोजन किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल योजनाओं का वितरण नहीं बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण और समुदाय आधारित विकास को गति देना है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. 42 बसाहटों में अभियान चल रहा है, लेकिन इन क्षेत्रों में अभियान शुरू होने से पहले कितने पात्र परिवार योजनाओं से वास्तव में वंचित थे?
2. शत-प्रतिशत सैचुरेशन का लक्ष्य तय किया गया है, तो क्या प्रशासन इसके परिणामों का स्वतंत्र सत्यापन भी कराएगा या केवल विभागीय आंकड़ों पर भरोसा किया जाएगा?
3. जिन आवेदनों को स्वीकृति दी जा रही है, उनमें लाभ वास्तविक रूप से हितग्राहियों तक पहुंचा या नहीं—इसकी निगरानी के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है?
