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| अंबिकापुर में ‘वेटलैंड बचाओ’ मिशन का बिगुल… अब जैव विविधता पर चलेगा संभागीय रोडमैप Aajtak24 News |
सरगुजा - जैव विविधता संरक्षण और वेटलैंड के महत्व को लेकर सरगुजा संभाग में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। सरगुजा वनमंडल के काष्ठागार में आयोजित एक दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला में विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और वन विभाग के अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर विस्तृत चर्चा की। कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद चिंतामणि महाराज उपस्थित रहे। उन्होंने “जल है तो कल है” का संदेश देते हुए स्टॉप डैम और चेक डैम जैसी जल संरचनाओं के महत्व पर जोर दिया। साथ ही मैनपाट क्षेत्र के जलाशयों और वेटलैंड को प्रदूषण मुक्त रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि पर्यावरण और वन संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने वेटलैंड संरक्षण में जनभागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया। कार्यशाला में टेंगुपुर बांध को प्रस्तावित रामसर वेटलैंड साइट के रूप में विकसित करने की दिशा में चल रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई। विशेषज्ञों ने जैव विविधता प्रबंधन समिति (BMC), पीपल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) और Access and Benefit Sharing (ABS) जैसे कानूनी और संरचनात्मक प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वेटलैंड संरक्षण के लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ाना जरूरी है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित और सतत उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम में वन संरक्षक से लेकर वनमंडलाधिकारी, आईएफएस अधिकारी, वैज्ञानिक, विधि सलाहकार, वेटलैंड मित्र और विभिन्न समितियों के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- रामसर साइट प्रस्ताव जैसी घोषणाएं बार-बार होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर वेटलैंड संरक्षण के लिए अब तक कितने ठोस और समयबद्ध परिणाम सामने आए हैं?
- स्थानीय समुदाय की भागीदारी की बात तो होती है, लेकिन क्या उन्हें वास्तव में निर्णय प्रक्रिया में अधिकार और आर्थिक लाभ (ABS) का हिस्सा मिल रहा है या सिर्फ औपचारिक भूमिका?
- मैनपाट और अन्य जलाशयों में प्रदूषण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, तो क्या प्रशासन इस बार केवल चर्चा से आगे बढ़कर सख्त निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई करेगा?
