विदिशा; 913 से 924 पहुंचा बेटियों का आंकड़ा, लेकिन क्या बदली सोच भी? विदिशा में ‘बेटी बचाओ’ पर बड़ा मंथन Aajtak24 News

विदिशा; 913 से 924 पहुंचा बेटियों का आंकड़ा, लेकिन क्या बदली सोच भी? विदिशा में ‘बेटी बचाओ’ पर बड़ा मंथन Aajtak24 News

विदिशा - बेटियों के जन्म, शिक्षा और सुरक्षा को लेकर सरकार भले लगातार अभियान चला रही हो, लेकिन सामाजिक चुनौतियां अब भी बड़ी हैं। इसी बीच विदिशा में “बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ” योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय टास्क फोर्स की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अनिल कुमार डामोर ने की, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में प्रशासन ने साफ संकेत दिए कि अब सिर्फ योजनाएं चलाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम भी दिखने चाहिए। प्रभारी कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में एएनसी रजिस्ट्रेशन शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए और हर गर्भवती महिला की नियमित स्वास्थ्य जांच हो। साथ ही प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक बालिकाओं का 100 प्रतिशत स्कूल प्रवेश सुनिश्चित करने और ड्रॉपआउट रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया।

बैठक में किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और जागरूकता को भी गंभीर मुद्दा माना गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में माहवारी स्वच्छता, पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इसके अलावा बाल विवाह रोकथाम, बालिकाओं की सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और स्कूलों में स्वच्छ शौचालय व्यवस्था को लेकर भी विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीता कांस्बा ने योजना की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि जिले का बालक-बालिका लिंगानुपात पहले 913 था, जो अब बढ़कर 924 तक पहुंच गया है। प्रशासन इसे सकारात्मक उपलब्धि मान रहा है और दावा कर रहा है कि यह विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

हालांकि सवाल अब भी कायम हैं कि क्या आंकड़ों में सुधार के साथ समाज की सोच में भी उतना ही बदलाव आया है? क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी बाल विवाह, स्कूल छोड़ती बेटियां और पोषण की कमी जैसी समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ऐसे में यह बैठक केवल समीक्षा नहीं बल्कि प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा भी मानी जा रही है कि योजनाओं का असर वास्तव में जमीन पर कितना दिखाई देता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. लिंगानुपात 913 से 924 होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या प्रशासन के पास यह आंकड़ा है कि जिले में अब भी कितने बाल विवाह गुपचुप तरीके से हो रहे हैं?
  2. बालिकाओं के ड्रॉपआउट रोकने की बात हर बैठक में होती है, लेकिन क्या शिक्षा विभाग यह बताएगा कि पिछले एक साल में कितनी बेटियां आर्थिक या सामाजिक कारणों से स्कूल छोड़ चुकी हैं?
  3. स्कूलों में स्वच्छ शौचालय और माहवारी स्वच्छता की बात की गई, तो क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि जिले के कितने सरकारी स्कूलों में आज भी बालिकाओं के लिए उपयोग योग्य शौचालय उपलब्ध नहीं हैं?

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