![]() |
| झाबुआ; 8.5 लाख स्क्रीनिंग के बाद बड़ा निर्देश: सिकल सेल मरीजों के लिए एक माह में दिव्यांग प्रमाण पत्र अनिवार्य Aajtak24 News |
झाबुआ - झाबुआ में कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सिकल सेल एनीमिया कार्यक्रम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी उन्मूलन अभियान और निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में अब तक 8 लाख 57 हजार से अधिक लोगों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें 1822 मरीज और 16,793 वाहक (carrier) चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 545 मरीजों को दिव्यांग प्रमाण पत्र और 309 मरीजों को पेंशन योजना का लाभ मिल चुका है।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि अगले एक माह के भीतर सभी पात्र सिकल सेल मरीजों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जाएं। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को सुविधा के साथ लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि सिकल सेल मरीजों के लिए एक आभा आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जिसमें स्क्रीनिंग, उपचार और फॉलोअप की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। साथ ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को “सिकल सेल मित्र” के रूप में जोड़ने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए एएनसी पंजीयन, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान और शत-प्रतिशत उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। शिशु स्वास्थ्य के तहत नवजात शिशुओं के घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं देने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा टीबी उन्मूलन अभियान, अधूरे निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने और गर्मी को देखते हुए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में हीट स्ट्रोक क्लीनिक शुरू करने के निर्देश दिए गए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब 8.5 लाख लोगों की सिकल सेल स्क्रीनिंग हो चुकी है, तो क्या 1822 मरीजों तक पहचान सीमित रह जाना यह दिखाता है कि फॉलोअप और ट्रैकिंग सिस्टम अभी भी कमजोर है?
- 545 मरीजों को दिव्यांग प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी बड़ी संख्या लंबित है — क्या ब्लॉक स्तर पर प्रशासनिक देरी इसकी मुख्य वजह है, और इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी?
- “सिकल सेल मित्र” और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी योजनाएं लागू होने के बाद क्या यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मरीजों को वास्तविक समय पर लाभ मिले, या यह भी केवल नई स्कीम बनकर रह जाएगी?
