खंडवा; बरसात से पहले अलर्ट मोड: जल गंगा कार्यों में ढिलाई नहीं चलेगी, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश Aajtak24 News

खंडवा; बरसात से पहले अलर्ट मोड: जल गंगा कार्यों में ढिलाई नहीं चलेगी, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश Aajtak24 News

खंडवा - खंडवा में कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में जल संरक्षण और विकास कार्यों को लेकर सख्त रुख देखने को मिला। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” के सभी कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से और वर्षा शुरू होने से पहले हर हाल में पूर्ण किए जाएं।कलेक्टर ने कहा कि बारिश का पानी व्यर्थ न जाए और भूजल स्तर में सुधार हो, इसके लिए सभी जनपद पंचायतों और नगर निकायों को सक्रिय रूप से काम करना होगा। उन्होंने सीईओ और सीएमओ को निर्देश दिए कि रिचार्ज पिट, जल स्रोतों के पुनर्भरण और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

बैठक में सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए ओंकारेश्वर में चल रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता और समयसीमा दोनों के साथ पूर्ण किए जाएं, और उनकी लगातार मॉनिटरिंग की जाए। ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी पर नाव संचालन को लेकर भी कड़े निर्देश जारी किए गए। कलेक्टर ने कहा कि नाव संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य हो, कोई भी अवयस्क नाव न चलाए, यात्रियों को सेफ्टी जैकेट पहनना जरूरी हो, और तेज हवा की स्थिति में नाव संचालन पूरी तरह रोका जाए।

इसके अलावा, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को मजबूत करने के लिए पुराने रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की मरम्मत, तालाबों के आसपास अतिक्रमण हटाने और पीओपी मूर्तियों पर रोक जैसे निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने मनरेगा कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी विकास कार्यों को गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करने पर जोर दिया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब जल गंगा संवर्धन अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया जा रहा है, तो क्या अब तक की धीमी प्रगति यह नहीं दिखाती कि मॉनिटरिंग और जमीनी क्रियान्वयन में गैप बना हुआ है?
  2. ओंकारेश्वर में नाव संचालन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बार-बार निर्देश देने के बावजूद क्या सुरक्षा मानकों का वास्तविक पालन सुनिश्चित हो पाया है, या यह केवल निर्देशों तक सीमित है?
  3. रूफ वाटर हार्वेस्टिंग और जल स्रोतों के पुनर्भरण जैसे पुराने सिस्टम टूटने के बाद भी सुधार धीमा क्यों है — क्या इसका मतलब है कि स्थायी रखरखाव व्यवस्था कमजोर है?

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