| बिलासपुर; फाइलों से निकलकर गांव पहुंचा प्रशासन: सालों से अटकी राहत आखिर 61 आदिवासी परिवारों तक पहुंची Aajtak24 News |
बिलासपुर - सुशासन तिहार के बीच प्रशासन ने एक ऐसे मामले का निराकरण किया, जो लंबे समय से लंबित था। अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित आदिवासी परिवारों को राहत राशि देने के लिए राजस्व अमला सीधे गांव पहुंचा और मौके पर सहायता राशि वितरित की गई। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देशन में राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के तहत कोटा अनुभाग के बेलगहना तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मझगवां के सरार टिकरा मोहल्ले में पूर्व वर्षों से लंबित मामलों का निराकरण किया गया। यहां 61 प्रभावित आदिवासी परिवारों को आंशिक मकान क्षति के लिए राहत सहायता दी गई।
नियमों के अनुसार आंशिक मकान क्षति पर प्रति हितग्राही अधिकतम 4 हजार रुपए की सहायता का प्रावधान है। इसी आधार पर 61 परिवारों को कुल 2 लाख 44 हजार रुपए की राशि वितरित की गई। विशेष बात यह रही कि राहत वितरण केवल कार्यालय स्तर तक सीमित नहीं रहा। कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार रोशन साहू और नायब तहसीलदार राहुल साहू स्वयं गांव पहुंचे और हितग्राहियों को चेक सौंपे। प्रशासन का कहना है कि उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं और राहत का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
हालांकि इस राहत वितरण के साथ एक बड़ा सवाल भी सामने आता है—यदि यह प्रकरण पूर्व वर्षों से लंबित थे, तो प्रभावित परिवारों को सहायता मिलने में इतना समय क्यों लगा? सुशासन की असली कसौटी राहत पहुंचाने से ज्यादा उसके समय पर पहुंचने में मानी जाएगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब नुकसान पूर्व वर्षों में हुआ था, तो 61 परिवारों को मुआवजा मिलने में इतनी देरी क्यों हुई और इसके लिए जवाबदेही किसकी तय की गई?
- क्या जिले में ऐसे और भी लंबित राहत प्रकरण हैं? यदि हैं तो उनकी संख्या और निराकरण की समयसीमा क्या है?
- आंशिक मकान क्षति पर 4 हजार रुपए की सहायता वर्तमान निर्माण लागत के हिसाब से कितनी पर्याप्त है और क्या राशि पुनरीक्षण का प्रस्ताव भेजा गया है?