| सबसे दूर, सबसे पहले… या सिर्फ नारा? 4 आदिवासी गांवों में शुरू हुआ ‘गरिमा उत्सव Aajtak24 News |
दुर्ग - जनजातीय क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करने और जनजातीय समाज की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से जिले में ‘जनजाति गरिमा उत्सव–जनभागीदारी अभियान’ की शुरुआत कर दी गई है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देश पर 18 से 25 मई 2026 तक चलने वाले इस अभियान की थीम “सबसे दूर, सबसे पहले” रखी गई है। अभियान के सफल संचालन को लेकर कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में संबंधित विभागों को तय समयसीमा में अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। दुर्ग जिले के 4 धरती आबा ग्रामों को इस अभियान के लिए चयनित किया गया है, जिनमें तीन गांव धमधा विकासखंड और एक गांव पाटन विकासखंड में स्थित है।
अभियान के तहत गांव स्तर पर संतृप्तिकरण शिविर, स्वास्थ्य परीक्षण, जनसुनवाई, जागरूकता कार्यक्रम, ट्रांसेक्ट वॉक और जनजातीय गरिमा उत्सव आयोजित किए जाएंगे। साथ ही गतिविधियों की निगरानी के लिए प्रतिदिन फोटो और वीडियो अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बैठक में आदिवासी विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, खाद्य, कृषि और जनसंपर्क सहित कई विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशासन का दावा है कि इस अभियान के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक योजनाओं की पहुंच और सेवा वितरण को मजबूत किया जाएगा।
लेकिन इस अभियान की सफलता केवल कार्यक्रमों के आयोजन से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि क्या चयनित गांवों में वास्तव में सेवाओं की उपलब्धता, शिकायतों का समाधान और जीवन स्तर में बदलाव दिखाई देता है या नहीं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- दुर्ग जिले में सिर्फ 4 धरती आबा ग्राम ही क्यों चुने गए? चयन के लिए कौन-से मानक अपनाए गए और बाकी आदिवासी गांव कब शामिल होंगे?
- प्रतिदिन फोटो और वीडियो अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं—क्या अभियान की सफलता जमीनी बदलाव से मापी जाएगी या सिर्फ पोर्टल रिपोर्टिंग से?
- 18 से 25 मई के बाद इन गांवों में कौन-से मापनीय बदलाव दर्ज किए जाएंगे और उनकी सार्वजनिक समीक्षा कब जारी होगी?