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| मंदसौर जनसुनवाई में प्रशासन सख्त: 58 शिकायतों पर तुरंत एक्शन के निर्देश Aajtak24 News |
मंदसौर - जिले में मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई में आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग एवं अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल ने कुल 58 आवेदकों की समस्याएं विस्तार से सुनीं और संबंधित विभागीय अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश जारी किए। जनसुनवाई में कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समाधान ही प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, इसलिए विशेष और गंभीर मामलों का उसी दिन त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी प्रकरण में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कलेक्टर ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण हो और प्रत्येक शिकायत की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
भूमि, राशन और योजनाओं से जुड़े कई मामले सामने आए
जनसुनवाई के दौरान भूमि विवाद, कब्जा हटवाने, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला योजना, संबल योजना, बिजली कनेक्शन और रास्ता खुलवाने जैसे कई महत्वपूर्ण मामले सामने आए।
- ग्राम रणायरा निवासी बालाराम ने भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग रखी, जिस पर तहसीलदार गरोठ को जांच के निर्देश दिए गए।
- बोलिया निवासी विष्णु ने शिकायत निराकरण को लेकर आवेदन दिया, जिस पर सीईओ जनपद गरोठ को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
- पानपुर निवासी गणेशराम ने बीपीएल और आयुष्मान कार्ड बनवाने की मांग की, जिस पर तहसीलदार सितामऊ को शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा कई नागरिकों ने बिजली कनेक्शन, संबल योजना के अंतर्गत अनुग्रह राशि, बीपीएल राशन कार्ड, और सार्वजनिक रास्ते से अतिक्रमण हटाने जैसे मुद्दे भी उठाए।
प्रशासन का फोकस—समयबद्ध समाधान
कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह जनता की समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी मंच है। इसलिए हर आवेदन पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए और प्रगति की रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन मामलों में फील्ड जांच आवश्यक है, वहां तुरंत टीम भेजकर स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि निर्णय में देरी न हो।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 58 शिकायतें हर जनसुनवाई में सामने आ रही हैं—क्या यह संकेत है कि स्थानीय स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन कमजोर है या फिर शिकायत निवारण प्रणाली प्रभावी नहीं है?
- “उसी दिन निराकरण” का निर्देश दिया गया है, लेकिन क्या विभागों के पास वास्तव में इतनी क्षमता और फील्ड स्टाफ है कि सभी मामलों का त्वरित समाधान हो सके?
- भूमि विवाद, राशन कार्ड और बिजली जैसी समस्याएं बार-बार क्यों लौट रही हैं—क्या इनके स्थायी समाधान के लिए कोई जिला स्तरीय सुधार योजना लागू की गई है या मामला केवल शिकायत-आधारित कार्रवाई तक सीमित है?
