धमतरी ; 539 फरियादें, सिर्फ 54 का मौके पर समाधान: क्या ‘सुशासन तिहार’ उम्मीदों का शिविर था या आंकड़ों का उत्सव? Aajtak24 News

धमतरी ; 539 फरियादें, सिर्फ 54 का मौके पर समाधान: क्या ‘सुशासन तिहार’ उम्मीदों का शिविर था या आंकड़ों का उत्सव? Aajtak24 News

धमतरी - जिले के कुरूद विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सिवनीकला में आयोजित “सुशासन तिहार 2026” का शिविर शुक्रवार को ग्रामीण समस्याओं, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक दावों का बड़ा मंच बन गया। शासन की मंशा के अनुरूप गांव-गांव तक प्रशासन पहुंचाने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में 15 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे और अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। शिविर में सिवनीकला, सिर्री, गातापार (आ), कुल्हाड़ी, फुसेरा, दर्रा, खर्रा, संकरी, चिवरी, मरौद, अंटग, कोडेबोड़, धूमा, परसट्ठी और अछोटी सहित 15 पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए। अलग-अलग विभागों ने अपने स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी और पात्र हितग्राहियों को मौके पर लाभ भी वितरित किया।

शिविर में कुल 539 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 537 मांग संबंधी और 2 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल रहे। हालांकि इनमें से केवल 54 मामलों का ही मौके पर निराकरण किया जा सका। बाकी सैकड़ों आवेदन अब विभागीय प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई के भरोसे हैं। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष गौकरण साहू ने कहा कि “सुशासन तिहार” शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का माध्यम बन रहा है। उन्होंने दावा किया कि अब प्रशासन खुद गांवों तक पहुंचकर समस्याएं सुन रहा है और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत धमतरी गजेन्द्र ठाकुर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आवेदनों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचना चाहिए।

शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र, चेक, कार्ड और अन्य सामग्री वितरित की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग ने नोनी सुरक्षा योजना के तहत प्रमाण-पत्र और पोषण टोकरी बांटी। समाज कल्याण विभाग ने दिव्यांगजनों को ट्राइसिकल वितरित की, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। कृषि विभाग ने नील-हरित कार्ड और विद्युत विभाग ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से जुड़ी जानकारी व लाभ उपलब्ध कराए। ग्रामीणों ने शिविर को उपयोगी बताते हुए शासन की पहल की सराहना की, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन सैकड़ों आवेदनों का तत्काल समाधान नहीं हो पाया, उनका निराकरण कितनी तेजी और गंभीरता से होगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 539 आवेदनों में सिर्फ 54 का मौके पर निराकरण हुआ, तो क्या प्रशासन पहले से पर्याप्त तैयारी के बिना ही शिविर आयोजित कर रहा है?
  2. जो सैकड़ों आवेदन लंबित रह गए, उनके निराकरण की समय-सीमा क्या तय की गई है और उसकी निगरानी कौन करेगा?
  3. सुशासन तिहार में योजनाओं के प्रचार पर ज्यादा जोर दिखा, लेकिन क्या प्रशासन यह बता सकता है कि पिछले शिविरों में मिले आवेदनों में से कितनों का वास्तविक समाधान धरातल पर हुआ?

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