सक्ती; शिविर में 538 आवेदन, मौके पर समाधान की रफ्तार”—सुशासन तिहार रगजा में जनसुनवाई बनी सेवा मेगा कैम्प Aajtak24 News

सक्ती; शिविर में 538 आवेदन, मौके पर समाधान की रफ्तार”—सुशासन तिहार रगजा में जनसुनवाई बनी सेवा मेगा कैम्प Aajtak24 News

सक्ती - जिले की ग्राम पंचायत रगजा में आयोजित सुशासन तिहार 2026 का जनसमस्या निवारण शिविर इस बार बड़े पैमाने पर ग्रामीण भागीदारी और त्वरित समाधान की वजह से चर्चा में रहा। 19 ग्राम पंचायतों से आए ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को सीधे मंच पर रखा, जहां प्रशासन ने कई मामलों का मौके पर ही निराकरण कर राहत देने का दावा किया। शिविर में कुल 538 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से तत्काल समाधान योग्य प्रकरणों को वहीं निपटा दिया गया, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को समयबद्ध निराकरण के लिए भेजा गया।

स्वास्थ्य, राशन और आवास—एक ही छत के नीचे सेवाएं

शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि ग्रामीणों को एक ही स्थान पर कई सरकारी सेवाओं का लाभ मिला—

  • आयुष्मान कार्ड वितरण
  • राशन कार्ड सुधार और निर्माण
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृति और चाबी वितरण
  • जॉब कार्ड और मनरेगा से जुड़ी सेवाएं
  • स्वास्थ्य परीक्षण और निःशुल्क दवाइयों का वितरण

महिलाओं के लिए आजीविका संवर्धन योजनाओं के तहत बिहान समूहों को भी लाभ दिया गया।

सांसद का अनोखा अंदाज—स्टॉल पर खुद कराया बीपी चेक

कार्यक्रम में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े ने न सिर्फ स्टॉलों का निरीक्षण किया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल पर स्वयं अपना ब्लड प्रेशर भी चेक कराया। यह दृश्य शिविर में चर्चा का विषय रहा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता का संदेश भी देता नजर आया।

प्रशासन का फोकस—“समस्या नहीं, समाधान”

कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो ने स्पष्ट निर्देश दिए कि—

  • सभी आवेदनों का समयसीमा में निराकरण किया जाए
  • बिजली और पानी से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता मिले
  • राज्य और जिला स्तर के प्रकरणों को अलग-अलग समयबद्ध रूप से हल किया जाए

एसपी ने भी शिकायतों के संवेदनशील निपटारे पर जोर दिया और कर्मचारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

योजनाओं का जमीनी मॉडल बना शिविर

शिविर में कई विभागों ने स्टॉल लगाकर योजनाओं का सीधा लाभ दिया—

  • प्रधानमंत्री आवास योजना
  • मनरेगा
  • खाद्य और राशन योजना
  • स्वास्थ्य और आयुष सेवाएं
  • महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम
  • श्रम और आजीविका योजनाएं

रगजा का यह शिविर सिर्फ एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि “डोरस्टेप गवर्नेंस” का उदाहरण बनता दिखा, जहां योजनाएं फाइलों से निकलकर सीधे ग्रामीणों तक पहुंचीं। 538 आवेदनों के साथ यह शिविर सरकार की “त्वरित समाधान” नीति की बड़ी परीक्षा भी साबित हुआ।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 538 आवेदनों में कितने मामलों का “पूर्ण समाधान” मौके पर हुआ और कितने केवल आगे की कार्रवाई के लिए भेजे गए—इसका वास्तविक अनुपात क्या है?
  2. शिविरों में त्वरित समाधान का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या लंबित मामलों के निपटारे की कोई सार्वजनिक ट्रैकिंग या फॉलो-अप प्रणाली मौजूद है?
  3. इतनी बड़ी संख्या में विभागीय स्टॉल और योजनाओं के बावजूद क्या यह सुनिश्चित है कि वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंच रहा है या लाभ सिर्फ शिविर स्तर तक सीमित रह जाता है?

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