| दुर्ग; दुर्घटना के बाद नहीं, पहले जागो! दुर्ग में उद्योगों को मिला सुरक्षा का सख्त संदेश Aajtak24 News |
दुर्ग - औद्योगिक विकास के साथ बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के बीच दुर्ग जिले में खतरनाक और अति खतरनाक श्रेणी के कारखानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। कला मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के उद्योगों के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला की अध्यक्षता कलेक्टर अभिजीत सिंह ने की। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल, औद्योगिक एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारी और विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यशाला का मुख्य फोकस कारखानों में होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम, श्रमिकों की सुरक्षा और सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन पर रहा। चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि औद्योगिक उत्पादन के साथ सुरक्षा व्यवस्था को समान प्राथमिकता देना आवश्यक है। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि किसी भी औद्योगिक इकाई की सफलता केवल उत्पादन से नहीं बल्कि वहां काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा से तय होती है। उन्होंने उद्योग प्रबंधन को निर्देश दिए कि सुरक्षा मानकों के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि दुर्घटनाओं को केवल जांच रिपोर्टों से नहीं रोका जा सकता, बल्कि इसके लिए नियमित प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और सुरक्षा ऑडिट को संस्थागत रूप देना होगा। कार्यशाला में भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों ने संयंत्र की कार्यप्रणाली और वहां अपनाए जा रहे सुरक्षा उपायों की जानकारी साझा की। विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भी अपने संस्थानों में लागू सुरक्षा मॉडल, चुनौतियां और सुधार के सुझाव रखे।
बैठक में औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों की एजेंडा आधारित समीक्षा की गई और इस बात पर सहमति बनी कि सुरक्षा संस्कृति को केवल अनुपालन नहीं बल्कि कार्य प्रणाली का स्थायी हिस्सा बनाया जाना चाहिए।हालांकि कार्यशालाओं में सुरक्षा पर चर्चा होती रही है, लेकिन बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या ये निर्देश कारखानों के उत्पादन क्षेत्र तक उसी गंभीरता से पहुंचते हैं या नहीं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिले के खतरनाक और अति खतरनाक कारखानों में पिछले तीन वर्षों में कितनी औद्योगिक दुर्घटनाएं हुईं और उनमें कितनी जगह सुरक्षा ऑडिट पहले से लंबित थे?
2. जिन उद्योगों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, उनके खिलाफ अब तक कितनी बार संचालन रोकने या दंडात्मक कार्रवाई की गई?
3. मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण की बात हो रही है—लेकिन क्या श्रमिकों के लिए स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन और गुमनाम शिकायत तंत्र भी उपलब्ध है?