| कोण्डागांव पुलिस ने दबिश देकर 5 जुआरियों को दबोचा Aajatak24 News |
कोण्डागांव - जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोण्डागांव पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित “खुडखुडिया” जुआ खेलाने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई ग्राम कमेला के वार्षिक मेले और सोनाबाल के साप्ताहिक बाजार में की गई, जहां खुलेआम पैसों का दांव लगाकर जुआ खिलाया जा रहा था।
पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीश्रीमाल के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चन्द्रा के मार्गदर्शन तथा एसडीओपी रूपेश कुमार और नरेंद्र पुजारी के पर्यवेक्षण में थाना कोण्डागांव और साइबर सेल की संयुक्त टीम लगातार अवैध गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इसी दौरान 16 मई 2026 को मुखबिर से सूचना मिली कि सोनाबाल बाजार और कमेला मेले में कुछ लोग प्रतिबंधित खुडखुडिया जुआ चला रहे हैं।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और अलग-अलग तीन मामलों में कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में समधु पोयाम, अशराम पनका, परितोष राय, पदमन सता और बृजलाल सेठिया शामिल हैं। इनमें कुछ आरोपी ओडिशा के नवरंगपुर जिले के निवासी भी बताए गए हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से खुडखुडिया गोटा (पासा), टोकना, पर्दा और 11 हजार 475 रुपए नगद जब्त किए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों से हार-जीत का दांव लगवाकर जुआ खेला रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 3 के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सौरभ उपाध्याय, उप निरीक्षक राजकुमार कोमरा सहित थाना और साइबर सेल की टीम की अहम भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जिले में अवैध जुआ, सट्टा और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- वार्षिक मेला और साप्ताहिक बाजार जैसे सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम जुआ चल रहा था, तो क्या स्थानीय स्तर पर पुलिस की निगरानी पहले से कमजोर थी?
- क्या पुलिस केवल छोटे स्तर के जुआ संचालकों पर कार्रवाई कर रही है, या इस नेटवर्क के पीछे जुड़े बड़े आयोजकों और आर्थिक संरक्षण देने वालों तक भी पहुंचने की तैयारी है?
- प्रतिबंधित खुडखुडिया जुआ लगातार मेलों और बाजारों में संचालित होने की शिकायतें मिलती रही हैं, तो क्या प्रशासन ने ऐसे आयोजनों के लिए कोई स्थायी निगरानी तंत्र विकसित किया है?