दुर्ग; 441 आवाजें पहुंचीं शिविर तक… 147 समस्याओं का मौके पर समाधान, पुरई में दिखा सुशासन का मॉडल Aajtak24 News

दुर्ग; 441 आवाजें पहुंचीं शिविर तक… 147 समस्याओं का मौके पर समाधान, पुरई में दिखा सुशासन का मॉडल Aajtak24 News

दुर्ग - सुशासन तिहार-2026 के तहत जनपद पंचायत दुर्ग क्षेत्र के ग्राम पंचायत पुरई स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और शासन-प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं। शिविर में कुल 441 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 147 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष मामलों के समाधान की प्रक्रिया समय-सीमा में पूरी किए जाने की बात कही गई।इस शिविर में मचांदुर, चिरपोटी, पाउवारा, कोड़िया, कोकड़ी, हनोदा, पुरई, खोपली, डुमरडीह, घुघसीडीह, उमरपोटी, कातरो, बोरीगारका और करगाडीह सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने भाग लिया। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर पहुंचकर लोगों ने अपनी मांग और शिकायतों से जुड़े आवेदन जमा किए।

शिविर के दौरान दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर और कलेक्टर अभिजीत सिंह ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस दौरान शासन की योजनाओं की जानकारी दी गई और कई हितग्राहियों को मौके पर लाभान्वित भी किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से 6 गर्भवती महिलाओं को पोषण टोकनी वितरित की गई। राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत 3 हितग्राहियों को प्रमाण पत्र दिए गए। वहीं मुख्यमंत्री वृद्धा पेंशन योजना के अंतर्गत 2 हितग्राहियों को प्रतीकात्मक चेक सौंपे गए।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक हितग्राही को स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया, जबकि 6 लाभार्थियों को उनके नए आवास की चाबी सौंपी गई। इसके साथ ही किशोरी बालिकाओं को सेनेटरी नैपकिन वितरित किए गए।शिविर की एक विशेष पहल क्लस्टर की सभी ग्राम पंचायतों के QR कोड का प्रदर्शन रहा। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मोबाइल से QR कोड स्कैन कर योजनाओं और कार्यों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। प्रशासन का दावा है कि इससे मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता और सूचना तक आसान पहुंच सुनिश्चित होगी। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी रही।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 441 आवेदन आए लेकिन मौके पर केवल 147 का निराकरण हुआ—क्या शेष 294 आवेदनों के लिए तय समयसीमा और जवाबदेही सार्वजनिक की जाएगी?
  2. सुशासन तिहार के शिविरों में त्वरित समाधान का दावा किया जाता है, लेकिन क्या इन आवेदनों के समाधान की बाद में स्वतंत्र समीक्षा भी होगी?
  3. QR कोड आधारित पारदर्शिता की पहल की गई है—क्या ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच और जागरूकता इतनी है कि लोग वास्तव में इसका उपयोग कर सकें?

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