| बस्तर; 377 गांव, एक मिशन: अब दफ्तर नहीं, गांव पहुंचेगा प्रशासन; शिकायत से समाधान तक सीधे निगरानी Aajtak24 News |
जगदलपुर - बस्तर के दूरस्थ और जनजातीय इलाकों में सरकारी योजनाओं की पहुंच और शिकायतों के त्वरित समाधान को लेकर प्रशासन ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देश पर जिले में ‘जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले’ थीम के तहत आदि कर्मयोगी अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत चयनित 377 गांवों में संचालित किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि सेवा संतृप्ति, स्वास्थ्य जागरूकता और शिकायतों के वास्तविक समाधान को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।
अभियान की शुरुआत जिला, विकासखंड और चयनित गांवों में उन्मुखीकरण कार्यक्रमों से की गई। इसके बाद गांवों में विशेष शिविर, जनजागरूकता गतिविधियां और वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रशासनिक टीमों ने गांवों का भ्रमण कर स्थानीय समस्याओं का आकलन शुरू कर दिया है। अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष जनसुनवाई कार्यक्रम हैं, जहां ग्रामीण सीधे अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे और समाधान प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। अभियान की सभी गतिविधियों की प्रगति रिपोर्ट आदि प्रसारण पोर्टल पर अपलोड की जा रही है ताकि निगरानी और जवाबदेही बनी रहे।
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में अभियान में भाग लेकर अपनी समस्याएं सामने रखें और शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. 377 गांवों में अभियान शुरू होने के बाद क्या शिकायतों के समाधान की समय-सीमा और सार्वजनिक रिपोर्टिंग व्यवस्था भी तय की गई है, या केवल शिविर आयोजन तक ही पहल सीमित रहेगी?
2. जिन गांवों में वर्षों से मूलभूत सेवाओं की पहुंच कमजोर रही है, वहां इस अभियान की सफलता मापने के लिए कौन से ठोस संकेतक तय किए गए हैं?
3. अभियान के दौरान दर्ज शिकायतों में यदि विभागीय लापरवाही सामने आती है, तो क्या जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की कोई अलग प्रणाली लागू की जाएगी?