रीवा में 283 शिकायतों पर सख्त कलेक्टर… लापरवाही पर 2 कर्मचारी निलंबित Aajtak24 News

रीवा में 283 शिकायतों पर सख्त कलेक्टर… लापरवाही पर 2 कर्मचारी निलंबित Aajtak24 News

रीवा - कलेक्ट्रेट के मोहन सभागार में आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई में मंगलवार को कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने 283 आवेदकों की समस्याएं सुनकर प्रशासनिक तंत्र को सख्त संदेश दिया। जनसुनवाई में भूमि विवाद, सीमांकन, अतिक्रमण, नक्शा तरमीम, सड़क-पुल निर्माण, हैंडपंप और पेंशन से जुड़े कई मामले सामने आए। कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए कि अनुभाग और तहसील स्तर पर जनसुनवाई को अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि लोगों को जिला मुख्यालय तक आने की जरूरत न पड़े।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि सीमांकन और राजस्व प्रकरणों में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर अर्थदंड लगाया जाएगा। साथ ही सेमरिया तहसीलदार के रीडर और डीपीसी कार्यालय के लिपिक को लापरवाही के चलते निलंबित करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा सीईओ जनपद गंगेव को नोटिस जारी करने और तहसीलदार सेमरिया व तहसीलदार गुढ़ का एक दिन का वेतन काटने के आदेश भी दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि जनसुनवाई में आने वाले मामलों का समयबद्ध निराकरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

जनसुनवाई में कई गंभीर मामले भी सामने आए। सीमांकन और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए, वहीं कंप्यूटरीकृत खसरे में गलत प्रविष्टि की जांच के आदेश भी जारी हुए। सड़क और पुल निर्माण से जुड़े एक मामले में पीडब्ल्यूडी को तत्काल कार्यवाही करने को कहा गया। एक भावुक क्षण उस समय देखने को मिला जब दूबी गांव के रामसिरोमणि मिश्रा ने शिकायत की कि उनके आवेदन पर कार्रवाई नहीं हो रही। कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें कुर्सी पर बैठाया, पानी पिलाया और उनकी समस्या को गंभीरता से सुना।

कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि सेवानिवृत्ति के बाद स्वत्व भुगतान से जुड़े लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनसुनवाई में सीईओ जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर, अपर कलेक्टर श्रीमती सपना त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि खंड स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 283 शिकायतों का एक साथ आना क्या यह संकेत है कि तहसील और अनुभाग स्तर की जनसुनवाई प्रणाली पूरी तरह प्रभावी नहीं है?
  2. लापरवाही पर निलंबन और वेतन कटौती के बावजूद क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई स्थायी जवाबदेही और निगरानी प्रणाली मौजूद है?
  3. भूमि विवाद और सीमांकन जैसे मामले लगातार क्यों बढ़ रहे हैं—क्या यह राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक ढांचे की पुरानी खामियों का परिणाम है?

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