| 'अफ्रीका दिवस- 2026’ विदेश राज्यमंत्री ने सम्मेलन में लिया हिस्सा |
नई दिल्ली - विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने यहां मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान में ‘अफ्रीका दिवस 2026’ के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने साझा इतिहास, विकास, नवाचार, सुरक्षा और समावेशी विकास पर आधारित भारत-अफ्रीका के गहरे संबंधों को रेखांकित किया।
राज्य मंत्री ने क्षमता निर्माण, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (डीपीआई) सहयोग, सतत विकास और वैश्विक शासन सुधारों के माध्यम से अफ्रीका के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने भारत-अफ्रीका की इस दीर्घकालिक साझेदारी को विकासशील देशों के बीच 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' का एक बेहद महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस सम्मेलन के दौरान सिंह ने 31 मई को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले आगामी चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन को लेकर भी उत्साह साझा किया।
सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद राज्य मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान में 'अफ्रीका दिवस 2026' के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मेलन को संबोधित किया। भारत और अफ्रीका के बीच गहरी जड़ों वाली साझेदारी पर प्रकाश डाला, जो साझा इतिहास, विकास, नवाचार, सुरक्षा और समावेशी विकास पर आधारित है। उन्होंने आगे कहा क्षमता निर्माण, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में सहयोग, सतत विकास और वैश्विक शासन सुधारों के माध्यम से अफ्रीका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया। साथ ही, ‘एआई स्पिरिट- नवाचार, लचीलेपन और समावेशी परिवर्तन के लिए भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी’ की थीम पर आधारित चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन का भी बेसब्री से इंतजार है।
उल्लेखनीय है कि अफ्रीकी दिवस उन अफ्रीकी नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को नमन करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने महाद्वीप को विदेशी (यूरोपीय) औपनिवेशिक शासन से आजाद कराया था।
बता दें कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान समस्त अफ्रीका क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को निरंतर प्रगाढ़ किया है। भारत एक तरफ जहां अपनी जी20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को जी20 का स्थायी सदस्य बनाकर पूरे ‘ग्लोबल साउथ की आवाज’ बनकर उभरा है। वहीं दूसरी ओर चीन के बुनियादी ढांचा ऋण (डेट-ट्रैप) मॉडल के विपरीत, भारत का दृष्टिकोण अफ्रीका में कौशल विकास, स्थानीय रोजगार, तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है, जिसे अफ्रीकी देश बेहद पसंद कर रहे हैं।