इंदौर में बसों पर प्रशासन का बड़ा ब्रेक: इमरजेंसी गेट बंद मिले, 2 बसें सड़क से बाहर, लाखों का जुर्माना Aajtak24 News

इंदौर में बसों पर प्रशासन का बड़ा ब्रेक: इमरजेंसी गेट बंद मिले, 2 बसें सड़क से बाहर, लाखों का जुर्माना Aajtak24 News

इंदौर - हालिया सड़क सुरक्षा चिंताओं के बीच इंदौर प्रशासन ने यात्री बसों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए साफ संदेश दिया है कि अब यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर आरटीओ और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने मंगलवार को शहर में बसों की सघन जांच अभियान चलाया, जिसमें कई गंभीर खामियां सामने आईं। स्टार चौराहे पर हुई इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान लोक परिवहन वाहनों, विशेष रूप से ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट पर चलने वाली बसों की जांच की गई। टीम ने बसों में इमरजेंसी एग्जिट, फायर सेफ्टी सिस्टम और आपातकालीन निकासी व्यवस्था की स्थिति को परखा।

जांच में कई बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई। कुछ बसों में इमरजेंसी एग्जिट बंद पाए गए, तो कई में अग्निशमन यंत्र खराब स्थिति में मिले। इतना ही नहीं, कुछ बसों पर ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट होने के बावजूद स्टेज कैरिज की तरह संचालन करने और परमिट शर्तों के उल्लंघन के आरोप भी पाए गए। कार्रवाई के तहत 8 बसों से कुल 2 लाख 26 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया, जबकि गंभीर सुरक्षा खामियों वाली 2 बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए। दस्तावेजों में कमी मिलने पर अलग से दंडात्मक कार्रवाई भी की गई।

जांच के दौरान प्रशासन ने केवल दंडात्मक रुख नहीं अपनाया बल्कि बस चालक और परिचालकों को सुरक्षा संबंधी समझाइश भी दी। उन्हें निर्देश दिए गए कि बसों में किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ न ले जाया जाए और यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले आपातकालीन स्थिति में क्या करना है, इसकी जानकारी दी जाए। प्रशासन ने सुझाव दिया कि जिस तरह हवाई यात्रा में यात्रियों को सुरक्षा निर्देश दिए जाते हैं, उसी तरह बसों में भी इमरजेंसी एग्जिट, कांच तोड़ने वाले हैमर और निकासी प्रक्रिया की जानकारी दी जानी चाहिए। यह कार्रवाई केवल जुर्माना वसूली नहीं बल्कि सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा संस्कृति लागू करने की दिशा में एक सख्त संकेत मानी जा रही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि इमरजेंसी एग्जिट बंद और फायर सिस्टम खराब थे, तो इन बसों को पहले फिटनेस प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी किया गया था?
  2. क्या यह अभियान नियमित निरीक्षण का हिस्सा था या किसी घटना के बाद की प्रतिक्रिया—और आगे इसकी आवृत्ति क्या होगी?
  3. दो बसों के फिटनेस निरस्त हुए, लेकिन क्या संबंधित निरीक्षण और अनुमति प्रक्रिया की जवाबदेही भी तय की जाएगी?

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