| रायपुर में देर शाम पुलिस का ‘सर्जिकल चेकिंग ऑपरेशन’—चौराहे सील, 2 चाकूबाज गिरफ्तार Aajtak24 News |
रायपुर - पुलिस कमिश्नरेट के मध्य जोन में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण के लिए 03 मई 2026 की शाम विशेष सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक प्रमुख चौराहों पर नाकेबंदी और एरिया सीलबंदी के साथ संचालित किया गया। पुलिस आयुक्त के निर्देशन और पुलिस उपायुक्त मध्य जोन के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान के दौरान कालीबाड़ी चौक, जयस्तंभ चौक, फाफाडीह चौक, अग्रसेन धाम टर्निंग और फुंडहर चौक जैसे संवेदनशील स्थानों पर रणनीतिक नाकेबंदी लगाई गई। यहां से गुजरने वाले प्रत्येक वाहन और संदिग्ध व्यक्ति की बारीकी से जांच की गई।
अभियान के दौरान पुलिस ने अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों पर सीधी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों में दो युवकों को धारदार चाकू के साथ गिरफ्तार किया। पहला मामला मौदहापारा क्षेत्र के दुर्गा कॉलेज के पास का है, जहां एक युवक पुलिस को देखकर भागने लगा, लेकिन घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। आरोपी के पास से बटनदार चाकू बरामद हुआ। वहीं दूसरे मामले में गंज थाना क्षेत्र के पास एक अन्य व्यक्ति को भी चाकू के साथ पकड़ा गया। इसके अलावा पुलिस ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर भी सख्ती दिखाई और ब्लैक फिल्म लगे वाहनों पर कार्रवाई की। लगभग एक दर्जन वाहनों से अवैध ब्लैक फिल्म हटवाई गई और चालानी कार्रवाई की गई।
अभियान के दौरान वारंटियों और पुराने अपराधियों की भी सूची के आधार पर तलाश की गई, जिससे कई संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सका। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अभियान शहर में अपराध पर लगाम लगाने और लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत करने के लिए नियमित रूप से जारी रहेगा। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
प्रेस वार्ता में पूछे जा सकने वाले 3 तीखे सवाल
- शहर के प्रमुख चौराहों पर चाकू लेकर घूम रहे लोग पकड़े जा रहे हैं, क्या इसका मतलब है कि अवैध हथियारों की सप्लाई चैन अब भी सक्रिय है और इसे रोकने में सिस्टम कहां कमजोर पड़ रहा है?
- ब्लैक फिल्म और छोटे अपराधों पर सख्ती दिखाई जा रही है, लेकिन बड़े अपराधियों और संगठित गिरोहों पर कार्रवाई कितनी प्रभावी हो रही है?
- ऐसे सघन चेकिंग अभियान क्या केवल रात्रिकालीन दिखावे तक सीमित हैं या इनके जरिए स्थायी अपराध नियंत्रण रणनीति भी लागू की जा रही है?