सतना; कलेक्टरों को अल्टीमेटम: 2 दिन में 90% गेहूं शिफ्ट करो, वरना कार्रवाई तय Aajtak24 News

सतना; कलेक्टरों को अल्टीमेटम: 2 दिन में 90% गेहूं शिफ्ट करो, वरना कार्रवाई तय Aajtak24 News

सतना - रीवा संभाग में शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की समीक्षा करते हुए कमिश्नर बीएस जामोद ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं का 90 प्रतिशत परिवहन दो दिनों के भीतर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए और सुरक्षित भंडारण कराया जाए।कमिश्नर ने निर्देश दिए कि किसानों को स्वीकृति पत्र तुरंत जारी किए जाएं और तीन दिवस के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही गेहूं परिवहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

पेयजल व्यवस्था को लेकर भी कमिश्नर ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पेयजल संबंधी शिकायतों का 24 घंटे के भीतर निराकरण किया जाए। सभी जिलों में उपलब्ध राइजर पाइप और सिंगल फेज मोटर का उपयोग प्रभावी ढंग से कर जल संकट से निपटा जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अधूरी एकल नल-जल योजनाओं को हर हाल में 30 जून तक पूर्ण किया जाए और पूरी हो चुकी योजनाओं को ग्राम पंचायतों को औपचारिक रूप से हस्तांतरित किया जाए।

जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा करते हुए कमिश्नर ने कहा कि वर्तमान प्रगति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही सभी कार्यों का रिकॉर्ड, फोटो और व्यय विवरण पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए। जनगणना कार्य की समीक्षा में उन्होंने कहा कि प्रगणक दो दिन के भीतर अपने क्षेत्रों का चिन्हांकन कर सर्वे कार्य प्रारंभ करें और कलेक्टर स्तर पर इसकी सतत निगरानी की जाए।

इसके अलावा बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, कुपोषण नियंत्रण, वनाधिकार, राजस्व प्रकरण और सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर भी विस्तृत समीक्षा की गई। 100 दिन से अधिक लंबित मामलों के त्वरित निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 2 दिन में 90% गेहूं परिवहन का लक्ष्य तय किया गया है—क्या मौजूदा लॉजिस्टिक क्षमता वास्तव में इतनी तेजी से काम करने में सक्षम है?
  2. कई जिलों में नल-जल योजनाएं वर्षों से अधूरी हैं, तो क्या 30 जून की डेडलाइन सिर्फ एक प्रशासनिक दबाव है या वास्तविक समाधान संभव है?
  3. सीएम हेल्पलाइन और लंबित शिकायतों की संख्या लगातार क्यों बढ़ रही है—क्या सिस्टम स्तर पर फॉलोअप मैकेनिज्म कमजोर है?

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