झिलमिल जलाशय से खेतों तक पहुँचेगी खुशहाली; ₹19.60 करोड़ से संवर रही नहरें Aajtak24 News

झिलमिल जलाशय से खेतों तक पहुँचेगी खुशहाली; ₹19.60 करोड़ से संवर रही नहरें Aajtak24 News

अनूपपुर - विंध्य अंचल का आदिवासी बहुल विकासखंड पुष्पराजगढ़ अब सिंचाई के संकट से मुक्त होकर सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत झिलमिल जलाशय की नहरों के कायाकल्प और विस्तार कार्य ने क्षेत्र के किसानों में नई उम्मीद जगा दी है। वर्षों से जर्जर नहरों और पानी की किल्लत से जूझ रहे इस अंचल में अब अंतिम छोर के खेत तक पानी पहुँचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

900 से अधिक किसानों का सिंचाई का सपना होगा साकार

प्रशासनिक सक्रियता और बेहतर जल प्रबंधन के कारण झिलमिल जलाशय परियोजना के सुदृढ़ीकरण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। लगभग 1960.40 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से संचालित इस परियोजना का सीधा लाभ क्षेत्र के 914 किसान परिवारों को मिलेगा। करीब 11 किलोमीटर लंबा सुदृढ़ नहर तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे 5.04 एमसीएम (MCM) क्षमता वाले जलाशय का पानी व्यवस्थित रूप से खेतों तक पहुँचेगा।

इन गाँवों की बदलेगी सूरत

इस महत्वाकांक्षी योजना से मुख्य रूप से बीजापुरी, पीपाटोला, कछरा टोला और झिलमिल गाँवों के कृषि रकबे में विस्तार होगा। परियोजना पूर्ण होने पर लगभग 905 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता सशक्त होगी। अब तक वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहने वाले ये किसान अब खरीफ के साथ-साथ रबी की फसलों की भी बेहतर पैदावार ले सकेंगे, जिससे उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी।

कलेक्टर की 'कड़ी निगरानी' और गुणवत्ता पर जोर

कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली स्वयं इस पूरी परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न हो और इसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। कलेक्टर के अनुसार, एक मजबूत और आधुनिक नहर प्रणाली ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होगी और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगी।

किसानों में उत्साह: "अब प्यासे नहीं रहेंगे खेत"

परियोजना की प्रगति देख स्थानीय किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। किसान जगत सिंह, ठाकुर सिंह और कमलेश्वर सिंह का कहना है कि पहले नहरें टूटी-फूटी होने के कारण पानी रास्ते में ही बर्बाद हो जाता था और ऊँचाई पर स्थित खेतों तक नहीं पहुँच पाता था। अब नहरों के पक्कीकरण और सुधार से यह समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी।

विकास का नया मॉडल

पुष्पराजगढ़ में झिलमिल जलाशय से निकलने वाला पानी न केवल खेतों को सिंचित करेगा, बल्कि भू-जल स्तर को सुधारने में भी सहायक होगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के तहत यह पहल न केवल कृषि विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है, बल्कि भविष्य के लिए जल संरक्षण का एक बेहतरीन मॉडल भी पेश कर रही है।

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