| एमसीबी; 17 दिन, 44 गांव और 100% लक्ष्य… खड़गवां ने जनगणना में रचा प्रशासनिक रिकॉर्ड Aajtak24 News |
एमसीबी - जनगणना 2027 के तहत हाउस लिस्टिंग एवं भवन गणना (HLB) कार्य में तहसील खड़गवां ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के अंतर्गत आने वाली इस तहसील ने मात्र 17 दिनों में 44 ग्रामों में 100 प्रतिशत HLB कार्य पूरा कर प्रशासनिक दक्षता और मजबूत टीमवर्क का उदाहरण पेश किया है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, मैदानी अमले और ग्रामीण नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय और सहभागिता की मिसाल बनकर सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार समयबद्ध रणनीति, लगातार मॉनिटरिंग और टीम की प्रतिबद्धता के कारण यह कार्य तय समय सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका।
HLB चरण को पूरा करने में 86 प्रगणकों और 15 पर्यवेक्षकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम ने गांव-गांव जाकर भवनों और परिवारों का सर्वेक्षण किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद मैदानी कर्मचारियों ने अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य किया। ग्रामीणों ने भी सर्वे टीम को पूरा सहयोग दिया, जिससे प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई।
इस अभियान की निगरानी अपर कलेक्टर अनिल सिदार और एसडीएम विजेंद्र सिंह सारथी द्वारा लगातार की जाती रही। अधिकारियों ने समय-समय पर समीक्षा बैठकें लेकर कार्य की गुणवत्ता और गति बनाए रखी। वहीं फील्ड स्तर पर जगदीश सिंह और राकेश सिंह ने प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे HLB कार्य व्यवस्थित और त्रुटिरहित तरीके से पूरा हो सका।
जिला प्रशासन ने बताया कि जनगणना 2027 देश की भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधन वितरण और सामाजिक-आर्थिक नीतियों की आधारशिला है। ऐसे में खड़गवां तहसील की यह उपलब्धि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि आगामी चरणों में भी इसी प्रतिबद्धता और जनसहभागिता के साथ कार्य जारी रहेगा, ताकि जनगणना की प्रक्रिया पूरी सटीकता और पारदर्शिता के साथ संपन्न हो सके।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 17 दिनों में 100% HLB कार्य पूरा करने का दावा किया गया है — क्या इतनी तेजी में डेटा की गुणवत्ता और सटीकता की स्वतंत्र जांच भी कराई जाएगी?
- क्या सभी 44 गांवों में डिजिटल और तकनीकी संसाधन पर्याप्त थे, या मैदानी कर्मचारियों को सीमित संसाधनों में काम करना पड़ा?
- जनगणना को विकास योजनाओं की नींव बताया जा रहा है, लेकिन क्या पिछली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर बनी योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच पाया है?