| गौरेला-पेंड्रा; अब सबसे पहले: 169 जनजातीय गांवों तक पहुंचा प्रशासन, योजनाओं के ‘संतृप्ति मॉडल’ की शुरुआत Aajtak24 News |
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही - जनजातीय क्षेत्रों में योजनाओं की पहुंच बढ़ाने और अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से जिले में 18 मई से 25 मई 2026 तक जनजातीय गरिमा उत्सव एवं जन भागीदारी अभियान शुरू किया गया है। “जन भागीदारी—सबसे दूर, सबसे पहले” थीम पर चल रहे इस अभियान के जरिए प्रशासन अब उन गांवों तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रहा है, जहां अब तक योजनाओं का लाभ सीमित स्तर तक पहुंच पाया था।
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के निर्देशानुसार संचालित इस अभियान के तहत जिले की 135 ग्राम पंचायतों और 169 गांवों को शामिल किया गया है। प्रशासन का दावा है कि इस पहल का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि पात्र हितग्राहियों तक उनका वास्तविक लाभ सुनिश्चित करना है।
अभियान के तहत विभिन्न ग्राम पंचायतों में धरती आबा जनजातीय गरिमा उत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में ग्रामीणों से सीधा संवाद, जनसुनवाई, योजनाओं की जानकारी, दस्तावेजी सहायता और मौके पर समाधान की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रशासन के अनुसार चयनित क्षेत्रों में जमीनी संपर्क अभियान, सेवा संतृप्ति कार्यक्रम, स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां और आदि सेवा केंद्रों के माध्यम से शिकायतों का पंजीयन व निराकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित अन्य जनजातीय समुदायों को विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं से जोड़ने के लिए ग्राम एवं क्लस्टर स्तर पर शिविर लगाए जा रहे हैं।
अभियान की रणनीति केवल आवेदन लेने तक सीमित नहीं रखी गई है। जिला प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि चयनित गांवों में सेवा वितरण का स्तर इस तरह बढ़े कि पात्र परिवार किसी भी मूलभूत योजना से वंचित न रहें। इसी उद्देश्य से क्लस्टर आधारित शिविर मॉडल अपनाया गया है, जिसके जरिए अधिक गांवों को एकीकृत तरीके से कवर किया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने इस अभियान को व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और ग्राम स्तरीय समितियों से सक्रिय सहयोग की अपील भी की है। प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी के बिना योजनाओं का वास्तविक असर जमीन पर दिखाई नहीं देगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. पिछले वर्षों में जिन जनजातीय गांवों को योजनाओं से संतृप्त घोषित किया गया था, उनमें से कितने गांवों का स्वतंत्र सामाजिक ऑडिट कराया गया और उसके परिणाम क्या रहे?
2. अभियान समाप्त होने के बाद यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि लाभ केवल पंजीयन तक सीमित न रहे और वास्तविक सेवाएं भी गांवों तक पहुंचें?
3. जिन पात्र परिवारों के दस्तावेज अधूरे हैं या रिकॉर्ड में नहीं हैं, उनके लिए स्थायी समाधान की क्या व्यवस्था बनाई गई है ताकि वे हर अभियान में दोबारा आवेदन करने को मजबूर न हों?