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| शहडोल; रामाबाई अस्पताल का 'महा-घोटाला': रक्षक ही बने भक्षक? 15 करोड़ का हिसाब और रसूखदारों की 'रहस्यमयी' खामोशी! Aajtak24 News |
शहडोल - शहडोल संभाग का ऐतिहासिक रामाबाई क्रिश्चियन अस्पताल इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नहीं, बल्कि 'सत्ता, साज़िश और संरक्षण' के एक ऐसे मकड़जाल के लिए चर्चा में है, जिसकी परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच रहा है। यह अब केवल एक अस्पताल का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों की संपत्ति को ठिकाने लगाने और "अपनों को बचाने, बेगानों को फंसाने" का एक सुनियोजित खेल प्रतीत होता है।
दोहरा खेल: पहले 'ताला' लगवाया, अब 'चाबी' के दावेदार?
अस्पताल की राजनीति का सबसे विचित्र पहलू यह है कि National Missionary Society of India (NMSI) के जो पदाधिकारी आज जनता के बीच अस्पताल दोबारा खोलने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, उन्हीं के इशारे पर अस्पताल को बंद कराने की पटकथा लिखी गई थी। सूत्रों का दावा है कि डॉ. सुरेश राजन, बिशप डॉ. फिलिप सिलास मसीह और ए. नेल्सन मंगलराज जैसे नामों की भूमिका संदिग्ध है। सवाल यह है कि जब प्रयास कुमार प्रकाश अस्पताल का संचालन कर रहे थे, तब आखिर किस स्वार्थ के चलते CMHO को पत्र लिखकर अस्पताल बंद करवाया गया? क्या यह सब इसलिए किया गया ताकि अस्पताल की बेशकीमती जमीनों और मशीनों पर "नए ठेकेदारों" का कब्जा हो सके?
15 करोड़ का 'मायाजाल' और बर्बाद होते परिवार
खबर की सबसे दहला देने वाली सच्चाई उन आरोपों में छिपी है, जिसने दो परिवारों को सड़क पर ला दिया। प्रयास कुमार प्रकाश और क्रिस्टी अब्राहम पर 15 करोड़ रुपये के गबन का ऐसा आरोप मढ़ा गया कि उनके घर, जमीन और गहने तक बिक गए। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि जिन लोगों पर अस्पताल के हरे-भरे पेड़ कटवाने, जनरेटर बेचने, महंगी मेडिकल मशीनें गायब करने और अस्पताल की गाड़ियां खुर्द-बुर्द करने के प्रत्यक्ष आरोप हैं, वे आज भी शहडोल की सड़कों पर बेखौफ घूम रहे हैं। आखिर यह कैसा न्याय है?
टांडी और चौकसे: पुलिस की 'मजबूरी' या 'नतमस्तक' सिस्टम?
शहडोल के चौक-चौराहों पर आज एक ही चर्चा है— श्रीमती शिल्पा टांडी और अशोक चौकसे पर कार्रवाई करने में पुलिस के हाथ क्यों कांप रहे हैं? क्या इन नामों को किसी अदृश्य शक्ति का संरक्षण प्राप्त है? चर्चा तो यहाँ तक है कि इस खेल की डोर शहडोल से लेकर भोपाल, इंदौर और सागर तक जुड़ी हुई है।
जनता पूछ रही है:
क्या जांच एजेंसियां सिर्फ रसूखदारों के इशारे पर काम कर रही हैं?
क्या "गांधी जी" (भ्रष्टाचार) के प्रभाव में फाइलों को दबा दिया गया है?
आखिर वह 'स्थानीय मास्टरमाइंड' कौन है, जो पर्दे के पीछे बैठकर पूरी स्क्रिप्ट लिख रहा है?
सागर की ओर इशारा और 'विदेशी' कनेक्शन की गूँज
अस्पताल की राजनीति में 'टांडी' परिवार का प्रवेश और अचानक बढ़ता दखल किसी बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करता है। सूत्रों की मानें तो इनके तार सागर जिले के किसी रसूखदार से जुड़े हैं, जिसके कारण स्थानीय प्रशासन भी कार्रवाई करने से बच रहा है। अस्पताल की करोड़ों की मशीनें और संसाधन कहाँ गए? इसका जवाब देने के बजाय सिस्टम ने चुप्पी साध रखी है।
सिस्टम की खामोशी या तूफान की आहट?
रामाबाई क्रिश्चियन अस्पताल एक सेवा का केंद्र था, जिसे आज 'राजनीति का अखाड़ा' बना दिया गया है। जब छोटे अपराधियों पर पुलिस तुरंत शिकंजा कसती है, तो इस करोड़ों के घोटाले के कथित सूत्रधार गिरफ्त से बाहर क्यों हैं? शहडोल की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि 15 करोड़ का सच और दोषियों के चेहरे से नकाब उतरते देखना चाहती है।
