| दुर्ग; 104 शिकायतें, आवास से लेकर कब्जे तक… जनदर्शन में गूंजा जनता का दर्द Aajtak24 News |
दुर्ग - जिले में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में आज आमजन की समस्याओं की लंबी सूची सामने आई। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने सभाकक्ष में नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी शिकायतें सुनीं और संबंधित विभागों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। कार्यक्रम में कुल 104 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें आवास, पेयजल, अवैध कब्जा, स्वास्थ्य सहायता और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामले प्रमुख रहे। जनदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान की मांग को लेकर कई आवेदन आए। ग्राम खपरी की एक महिला ने बताया कि वह जर्जर कच्चे मकान में रह रही है, जहां बरसात में खतरा बढ़ जाता है। इस पर कलेक्टर ने पात्रता जांच कर प्राथमिकता से आवास स्वीकृत करने के निर्देश दिए।
इसी दौरान भिलाई की एक बुजुर्ग महिला ने गंभीर रूप से बीमार पुत्र के इलाज और परिवार के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता की मांग की। उन्होंने बताया कि पुत्र की दोनों किडनियां खराब हैं और परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को तत्काल सहायता सुनिश्चित करने को कहा। पेयजल समस्या को लेकर ग्राम अमलीडीह के ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई कि जल जीवन मिशन के तहत टंकी बनने के बावजूद घरों तक नियमित पानी नहीं पहुंच रहा है। इस पर पीएचई विभाग को तत्काल स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
जनदर्शन में अवैध कब्जों के कई मामले भी सामने आए। स्मृति नगर क्षेत्र में आवंटित मकान पर परिजनों द्वारा कब्जा करने की शिकायत की गई, वहीं बघेरा और शीतला नगर बोरसी में सार्वजनिक और निजी भूमि पर अवैध कब्जे तथा बिना अनुमति 5G टावर लगाने का विरोध दर्ज कराया गया। कलेक्टर ने राजस्व और पुलिस विभाग को जांच कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके अलावा नालियों की सफाई, जल निकासी, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि विवाद से जुड़े मामलों पर भी आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर संबंधित एसडीएम और तहसीलदारों को मौके पर जाकर निराकरण सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जनदर्शन में बार-बार पेयजल और आवास की शिकायतें आने के बावजूद क्या स्थायी समाधान के लिए विभागीय जवाबदेही तय की जा रही है या केवल निर्देश जारी किए जा रहे हैं?
- अवैध कब्जे और बिना अनुमति निर्माण (जैसे 5G टावर) जैसे मामलों में क्या पूर्व अनुमति और निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है?
- गंभीर बीमारी के इलाज जैसी मामलों में क्या जिला स्तर पर कोई आपात आर्थिक सहायता कोष (emergency relief system) सक्रिय रूप से काम कर रहा है या हर बार अलग-अलग आदेशों पर निर्भरता है?