महासमुंद; हाईवे किनारे ‘कबाड़’ के नाम पर क्या चल रहा था खेल? पुलिस ने 10 टन स्क्रैप यार्ड किया सीलबंद Aajtak24 News

महासमुंद; हाईवे किनारे ‘कबाड़’ के नाम पर क्या चल रहा था खेल? पुलिस ने 10 टन स्क्रैप यार्ड किया सीलबंद Aajtak24 News

महासमुंद - जिले में अवैध कबाड़ कारोबार और संदिग्ध संपत्तियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत महासमुंद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-53 किनारे संचालित एक स्क्रैप यार्ड पर छापा मारा। पुलिस ने मौके से करीब 10 टन संदिग्ध लोहा स्क्रैप बरामद कर पूरे यार्ड को सीलबंद कर दिया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम सिरको स्थित एक कबाड़ यार्ड में अवैध रूप से भारी मात्रा में स्क्रैप सामग्री जमा की जा रही है। सूचना की तस्दीक के बाद थाना बसना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए यार्ड पर दबिश दी।

छापेमारी के दौरान यार्ड संचालक तनवीर दानी की मौजूदगी में तलाशी ली गई। जांच में भारी मात्रा में लोहा स्क्रैप बरामद हुआ, जिसमें पुरानी मशीनें, पंप, साइकिल, मोटरसाइकिल पार्ट्स, लोहे के एंगल, पाइप, पुराने टीन, कूलर, पंखे और अन्य कबाड़ सामग्री शामिल थी। बरामद सामग्री का अनुमानित वजन लगभग 10 टन बताया गया है।

पुलिस ने मौके पर यार्ड संचालक से स्क्रैप सामग्री से जुड़े वैध दस्तावेज, बिल और व्यापार लाइसेंस प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन वह कोई संतोषजनक दस्तावेज नहीं दिखा सका। दस्तावेजों के अभाव में पुलिस ने पूरी सामग्री को संदिग्ध संपत्ति मानते हुए बीएनएसएस की धारा 106 के तहत जब्त कर लिया और पूरे स्क्रैप यार्ड को मौके पर ही सीलबंद कर दिया।

थाना बसना में इस मामले में वैधानिक कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद स्क्रैप सामग्री कहां से लाई गई थी और इसके पीछे किसी बड़े अवैध नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है। महासमुंद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध कारोबार, चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त और संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 10 टन स्क्रैप बिना वैध दस्तावेजों के जमा था — क्या यह केवल लाइसेंस की अनियमितता है या चोरी और अवैध खरीद-फरोख्त के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है?
  2. राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे इतने बड़े स्तर पर कबाड़ यार्ड संचालित हो रहा था, तो क्या स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह निष्क्रिय थी?
  3. क्या पुलिस अब यह जांच करेगी कि बरामद लोहे का संबंध कहीं सरकारी संपत्तियों, रेलवे या औद्योगिक चोरी से तो नहीं है, या मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगा?

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