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| मनगवां SDO कार्यालय बना 'तारीख पे तारीख' का अड्डा: वकील का छलका दर्द, भ्रष्टाचार और राजस्व हानि के गंभीर आरोप Aajtak24 News |
रीवा/मनगवां - रीवा जिले के मनगवां अनुभागीय अधिकारी (SDO) कार्यालय में इन दिनों न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले लोग दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ताजा मामला सिविल कोर्ट के एक अधिवक्ता से जुड़ा है, जिन्होंने कार्यालय की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए व्यापक भ्रष्टाचार और अनियमितता के संगीन आरोप लगाए हैं। अधिवक्ता का स्पष्ट कहना है कि यहाँ अधिकारी जनता के काम करने के बजाय फाइलों को लटकाने में ज्यादा विश्वास रखते हैं।
6 पेशियां और सिर्फ आश्वासन का खेल
शिकायतकर्ता अधिवक्ता के अनुसार, ग्राम देवगाँव के आराजी नंबर 742, 743 और 744 के डायवर्शन का मामला लंबे समय से SDO कार्यालय में लंबित है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 5 से 6 पेशियों से लगातार केवल तारीखें बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन मामले की मेरिट पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अधिवक्ता ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि "न्याय के मंदिर में जब एक वकील को घंटों खड़ा रखा जाता है, तो आम जनता की क्या बिसात?"
आदेश पत्रिका (Order Sheet) में दर्ज नहीं होता विवरण
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि वे सुबह 12:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक कार्यालय में सुनवाई का इंतज़ार करते रहे। अंत में अधिकारी ने केवल मौखिक रूप से 'सुन लिया है' कहकर चलता कर दिया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि सुनवाई के बाद न तो आदेश पत्रिका में कोई विवरण दर्ज किया गया और न ही कोई स्पष्ट आदेश जारी हुआ। यह कार्यप्रणाली प्रशासनिक शिथिलता के साथ-साथ किसी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
सरकारी खजाने को पहुंचाई जा रही क्षति
अधिवक्ता ने सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक तरफ शासन की मंशा राजस्व बढ़ाने की है, वहीं दूसरी ओर यहाँ के अधिकारी डायवर्शन जैसे राजस्व वृद्धि वाले मामलों को रोककर बैठे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि फाइलों को जानबूझकर लटकाना क्या शासन को आर्थिक क्षति पहुँचाने की साजिश नहीं है?
प्रशासनिक गलियारों में हलचल
इस घटना ने मनगवां के प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह मामला केवल एक फाइल का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जहां आम आदमी और अब तो वकील भी दफ्तरों की सीढ़ियां घिसने को मजबूर हैं।
वकील की मांग: पीड़ित अधिवक्ता ने उच्चाधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच और लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण की मांग की है। अब देखना यह है कि रीवा जिला प्रशासन इस 'तारीख पे तारीख' वाली संस्कृति पर कब लगाम लगाता है।
