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| रीवा-मऊगंज में कट मनी का मायाजाल, सड़कों पर खुलेआम 'सेवा शुल्क' की वसूली! Aajtak24 News |
मऊगंज - मध्य प्रदेश के रीवा और नवगठित मऊगंज जिले में इन दिनों विकास की चर्चा कम और "कट मनी" की गूँज अधिक सुनाई दे रही है। परिवहन, पुलिस, खनिज और राजस्व जैसे मलाईदार विभागों पर भ्रष्टाचार के जो आरोप लग रहे हैं, वे अब केवल दबी जुबान में नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी सुर्खियाँ बन रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी ने इन दावों को और हवा दे दी है कि यहाँ सिस्टम नियमों से नहीं, बल्कि 'हिस्सेदारी' से चल रहा है।
सड़कों पर वसूली का 'सिंडिकेट' सूत्रों की मानें तो रीवा, मऊगंज, हनुमना और चाकघाट जैसे मुख्य मार्गों पर यात्री बसों और मालवाहक वाहनों से कथित "सेवा शुल्क" वसूलने का एक व्यवस्थित नेटवर्क सक्रिय है। बिना ड्रेस के चालक, गायब किराया सूची और एक्सपायर्ड परमिट के बावजूद इन बसों का निर्बाध संचालन यह संकेत देता है कि नियमों की आँखों पर 'महीने की पट्टी' बंधी हुई है। सबसे खतरनाक बात यह है कि इसी नेटवर्क की आड़ में नशीले पदार्थों के परिवहन की आशंका भी प्रबल हो गई है।
नीचे से ऊपर तक 'निर्धारित' हिस्सा? क्षेत्र में चर्चा आम है कि वसूली की यह राशि केवल निचले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा "ऊपर" तक जाता है। यही कारण है कि एक विभाग दूसरे की अनियमितता पर कार्रवाई करने से कतराता है। आरक्षक स्तर के कर्मचारियों को "कलेक्शन" की जिम्मेदारी दिए जाने की अपुष्ट खबरें भी सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़े प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
सुरक्षा ताक पर, प्रशासन मौन कलेक्टर और विभागीय प्रमुखों के पास असीमित अधिकार होने के बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदल रही। मेडिकल बॉक्स और फायर सेफ्टी जैसे मानकों की अनदेखी यात्रियों के जीवन को खतरे में डाल रही है। पुलिस गवाहों के अभाव का तर्क देकर अपना पल्ला झाड़ लेती है, लेकिन सवाल यह है कि जब अवैध गतिविधियों की जानकारी आम जनता को है, तो खुफ़िया तंत्र और मुखबिर क्यों नाकाम हैं?
रीवा और मऊगंज में यह "कट मनी" कल्चर केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बनता जा रहा है। यदि समय रहते इन अवैध वसूली केंद्रों पर नकेल नहीं कसी गई और विभागों के बीच जवाबदेही तय नहीं हुई, तो जनता का सरकारी तंत्र से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा।
