गोविंदगढ़ के जंगलों में भीषण वनाग्नि, बुझाने में जुटे समाजसेवी और दमकल कर्मी Aajtak24 News

गोविंदगढ़ के जंगलों में भीषण वनाग्नि, बुझाने में जुटे समाजसेवी और दमकल कर्मी Aajtak24 News

रीवा -  जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र अंतर्गत आने वाली प्रसिद्ध छुहिया घाटी और विंध्य पर्वत श्रृंखला इन दिनों आग की लपटों से घिरी हुई है। पिछले एक सप्ताह से लगी भीषण वनाग्नि ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे हज़ारों एकड़ में फैली वन संपदा और बेजुबान वन्यजीवों पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।

हफ्ते भर से जारी है तांडव हैरानी की बात यह है कि आग लगे सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। आग की लपटें विंध्य पर्वत के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले चुकी हैं। धुएं के कारण आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है और वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक तरीके से बढ़ गया है।

समाजसेवियों ने संभाला मोर्चा जब सरकारी तंत्र की कोशिशें कम पड़ती दिखीं, तो स्थानीय समाजसेवियों ने हिम्मत दिखाई। समाजसेवी पीयूष त्रिपाठी और राहुल शर्मा नगर परिषद गोविंदगढ़ की फायर ब्रिगेड टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आग बुझाने में जुटे हुए हैं। दिन-रात की कड़ी मशक्कत के बाद शिकारघा की पहाड़ी के एक छोटे हिस्से को सुरक्षित किया जा सका है, लेकिन पहाड़ के दुर्गम रास्तों पर आग अब भी तेजी से फैल रही है।

आधुनिक तकनीकों की उठी मांग वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक तरीकों से इतनी बड़ी आग पर काबू पाना असंभव है। शासन-प्रशासन से अपील की गई है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ड्रोन तकनीक या हेलीकॉप्टर के माध्यम से पानी और फायर रिटार्डेंट का छिड़काव किया जाए।

प्रशासनिक सक्रियता की दरकार स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि वन विभाग इस आपदा को रोकने में अब तक विफल रहा है। यदि समय रहते युद्ध स्तर पर संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चलाया गया, तो विंध्य पर्वत का यह हरा-भरा जंगल राख के ढेर में तब्दील हो जाएगा।



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