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| सड़क या घोटाला? मनगवां में भ्रष्टाचार की गवाही दे रही 'घास वाली सड़क' Aajtak 24 News |
रीवा - रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र से विकास की एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने शासन-प्रशासन के तमाम दावों को 'धरातल' पर ला दिया है। यहाँ सड़क निर्माण के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये किस तरह 'मिट्टी' में मिला दिए गए, इसका जीता-जागता सबूत आंबी मार्ग से डुभकी गौतमान टोला तक जाने वाली सड़क दे रही है। करीब 83 से 84 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बनी इस सड़क की डामर अब इतिहास बन चुकी है और उसकी जगह अब लहलहाती घास ने ले ली है।
भ्रष्टाचार की अनोखी दास्तान
आमतौर पर सड़कों में गड्ढे होना आम बात है, लेकिन सड़क के बीचों-बीच घास का उग आना यह साबित करता है कि निर्माण के दौरान डामर और गिट्टी का अनुपात क्या रहा होगा। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस सड़क के निर्माण में मानक प्रक्रियाओं की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। सड़क के नाम पर सिर्फ मिट्टी बिछाकर उस पर डामर की एक पतली परत चढ़ा दी गई थी, जो पहली ही बारिश भी नहीं झेल सकी। आज आलम यह है कि सड़क ढूंढने से भी नहीं मिलती, सिर्फ कटीली झाड़ियाँ और घास ही नजर आती है।
ग्रामीणों का दर्द: "सड़क में गड्ढा सुना था, यहाँ तो सड़क में खेत है"
क्षेत्र के ग्रामीणों में इस भ्रष्टाचार को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि सड़क की बदहाली के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि, "हमने सुना था कि गड्ढों में सड़क होती है, लेकिन मनगवां के इस अजब विकास में सड़क के ऊपर घास उग रही है। यह सीधे-सीधे अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का परिणाम है।" ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि हाल ही में मेंटेनेंस (रखरखाव) के नाम पर भी कुछ लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन धरातल पर एक तसला गिट्टी भी नहीं डाली गई।
कागजों पर दौड़ रहा मेंटेनेंस का पहिया
सूत्रों की मानें तो इस मार्ग के मेंटेनेंस के नाम पर समय-समय पर मोटी रकम आहरित की जाती रही है। विभाग के फाइलों में यह सड़क शायद 'चकाचक' दिखाई दे रही होगी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहाँ से पैदल निकलना भी दूभर है। डुभकी गौतमान टोला के रहवासियों के लिए यह सड़क अब एक अभिशाप बन चुकी है। बारिश के दिनों में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है जब पूरी 'सड़क' दलदल में तब्दील हो जाती है।
जांच हुई तो खुलेगा करोड़ों का खेल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विशेष मार्ग के साथ-साथ मनगवां विधानसभा क्षेत्र की अन्य ग्रामीण सड़कों की भी तकनीकी जांच (Quality Audit) कराई जाए, तो लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के करोड़ों रुपये के घोटालों का पर्दाफाश हो सकता है। यह मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं है, बल्कि उस कार्यप्रणाली का है जहाँ ठेकेदारों को बिना गुणवत्ता जांचे भुगतान कर दिया जाता है।
प्रशासन से तीखे सवाल
अब जनता प्रशासन से जवाब मांग रही है। क्या 84 लाख की राशि केवल घास उगाने के लिए स्वीकृत की गई थी? क्या निर्माण के समय सुपरवाइजर और इंजीनियर मौके पर मौजूद थे? और सबसे बड़ा सवाल यह कि इस सड़क की इस हालत के बाद भी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया? मनगवां क्षेत्र की जनता अब इस मामले को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत करने की तैयारी में है। यदि जल्द ही इस सड़क का नए सिरे से निर्माण नहीं हुआ और भ्रष्टाचार में संलिप्त चेहरों को बेनकाब नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यहाँ का जन-आक्रोश सड़कों पर दिखाई देगा।
