नारायण त्रिपाठी का डिप्टी सीएम पर हमला: "रीवा को छोटा शहर कहना विंध्य की विरासत का अपमान" Aajtak24 News

नारायण त्रिपाठी का डिप्टी सीएम पर हमला: "रीवा को छोटा शहर कहना विंध्य की विरासत का अपमान" Aajtak24 News

रीवा - विंध्य क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के उस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है, जिसमें उन्होंने रीवा को एक 'छोटे शहर' के विकसित होने का उदाहरण बताया था। त्रिपाठी ने इसे विंध्य की अस्मिता से जोड़ते हुए उपमुख्यमंत्री को इतिहास की याद दिलाई है।

इतिहास का दिया हवाला

नारायण त्रिपाठी ने कहा कि रीवा को छोटा शहर कहना यहाँ के गौरवशाली इतिहास का मजाक उड़ाना है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा, "जब मध्य प्रदेश अस्तित्व में नहीं था, तब विंध्य प्रदेश हुआ करता था और रीवा उसकी गौरवशाली राजधानी थी। जिस शहर ने आपको मान-सम्मान और शोहरत दी, उसे आज आप छोटा कहकर अपमानित कर रहे हैं।"

दिग्गजों की धरती है रीवा

त्रिपाठी ने रीवा की धरती से निकले महान सपूतों का जिक्र करते हुए कहा कि इस मिट्टी ने लाल पद्मधर सिंह, दादू गोविन्द नारायण सिंह, शंभूनाथ शुक्ला, कुंवर अर्जुन सिंह और श्रीनिवास तिवारी जैसे दिग्गज नेता दिए हैं, जिन्होंने पूरे देश में विंध्य का परचम लहराया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि रीवा दशकों से संभाग और कमिश्नरी मुख्यालय है, जिसे छोटा कहना तर्कहीन है।

रोजगार और पलायन पर घेरा

विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए त्रिपाठी ने कहा कि उपमुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि आखिर युवाओं के रोजगार के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? उन्होंने कहा कि आज भी विंध्य का युवा बेरोजगारी के कारण पूरे देश में भटक रहा है, जिसकी भयावह तस्वीर कोरोना काल के दौरान पलायन के रूप में सामने आई थी। त्रिपाठी ने अंत में कहा कि रीवा सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि विंध्य की धड़कन और हमारी अनमोल धरोहर है। इसे किसी की उपमा की जरूरत नहीं है, बल्कि यहाँ के संसाधनों और युवाओं को न्याय की जरूरत है।

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