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| रायपुर पुलिस का 'ऑपरेशन संडे': जब बदमाशों की नींद टूटी और खाकी सामने खड़ी मिली; 132 की कुंडली खंगाली Aajtak24 News |
रायपुर - रविवार की सुबह जैसे ही शहर ने आंखें खोलीं, उससे पहले ही रायपुर पुलिस ने सेंट्रल ज़ोन में ऐसा हाई-वोल्टेज अभियान छेड़ दिया जिसने अपराधियों की पूरी चैन छीन ली। यह कोई सामान्य चेकिंग नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित, बहुस्तरीय और रणनीतिक ऑपरेशन था, जिसका मकसद साफ था—शहर में अपराध के हर नेटवर्क को जड़ से हिलाना और कानून का सख्त संदेश देना। तड़के सुबह अलग-अलग थानों की पुलिस टीमें एक साथ एक्टिव हुईं। कोतवाली, गोलबाजार, मौदहापारा, गंज, सिविल लाइन, देवेंद्र नगर और तेलीबांधा जैसे संवेदनशील इलाकों में एक साथ दबिश दी गई। अचानक बढ़ी पुलिस हलचल ने उन बदमाशों को चौंका दिया जो अब तक खुद को सुरक्षित मानकर बैठे थे।
इस मेगा ड्राइव में कुल 132 हिस्ट्रीशीटर, गुंडा और निगरानी बदमाशों को चिन्हित कर उनकी गतिविधियों की बारीकी से जांच की गई। कई को थानों में बुलाकर लाइनअप कराया गया—जहां उनकी पहचान, रिकॉर्ड और वर्तमान गतिविधियों की गहन पड़ताल की गई। वहीं, चाकूबाजी जैसे गंभीर मामलों में शामिल पुराने आरोपियों के घरों पर अचानक रेड डालकर उनकी मौजूदगी और व्यवहार की जांच की गई।
ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता:
इस पूरे अभियान में 11 वारंटी अपराधियों की गिरफ्तारी हुई, जिनमें 8 स्थाई वारंटी शामिल हैं। ये वो आरोपी थे जो लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहे थे, लेकिन इस बार उनकी चालाकी बेअसर साबित हुई। पुलिस ने उन्हें धर दबोचा और अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज कर दी गई है।
आंकड़े जो बताते हैं ऑपरेशन की गहराई:
- करीब 28% बदमाश खुद थानों में हाजिर होकर सत्यापन में शामिल हुए
- लगभग 24% आरोपी पहले से जेल में बंद मिले
- करीब 20% अपने घरों से फरार पाए गए — अब इनकी तलाश के लिए अलग से विशेष अभियान चलाया जा रहा है
- बाकी आरोपियों को उनके घरों पर जाकर चेक किया गया, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके
फिंगरप्रिंट से डिजिटल निगरानी तक:
इस बार पुलिस ने टेक्नोलॉजी का भी भरपूर इस्तेमाल किया। सभी संदिग्धों के फिंगरप्रिंट लेकर उन्हें NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) में दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि अब कोई भी अपराधी अपनी पहचान छिपाकर बच नहीं पाएगा—हर हरकत सिस्टम में कैद रहेगी।
सख्त चेतावनी और मनोवैज्ञानिक दबाव:
पुलिस ने केवल कार्रवाई ही नहीं की, बल्कि बदमाशों को खुली चेतावनी भी दी—अगर अपराध की राह नहीं छोड़ी, तो अगली कार्रवाई और ज्यादा कठोर होगी। नियमित थाना हाजिरी और कानून पालन को अनिवार्य किया गया, जिससे उन पर लगातार निगरानी बनी रहे।
शहर में असर:
इस ऑपरेशन के बाद शहर में साफ बदलाव महसूस किया गया। आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा, वहीं अपराधियों के बीच डर का माहौल बन गया। जिन इलाकों में अक्सर आपराधिक गतिविधियां होती थीं, वहां अचानक सन्नाटा और सतर्कता दोनों नजर आई।
आगे क्या?
पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में और भी बड़े और सख्त अभियान चलाए जाएंगे। फरार बदमाशों के खिलाफ अलग से फोकस ऑपरेशन तैयार किया जा रहा है, जिससे उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
रायपुर पुलिस का यह ‘ऑपरेशन सख्ती’ केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है—अब अपराधियों के लिए शहर में कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा। कानून का शिकंजा कस चुका है, और हर गलत कदम पर अब तुरंत कार्रवाई तय है।
